जावरा। अन्नक्षेत्र जनकल्याण समिति के सेवा प्रकल्पों को देखते हुए इसका नाम अन्नक्षेत्र प्राणी कल्याण समिति रख देना चाहिए.! ऐसा इसलिए कि इस समिति के सेवा कार्यों का दायरा बहुत व्यापक होकर जनकल्याण ही नहीं प्राणीमात्र से जुड़ा हुआ है। इस सेवा संस्थान की गतिविधियां महज मानव कल्याण के कार्य तक ही सीमित नहीं है..! भले ही इसका नाम अन्नक्षेत्र जनकल्याण समिति हो, पर काम…काम जनक्षेत्र के अलावा मुकबधिरों का ख्याल रखना भी है। लोगों के जीते जी उनकी सेवा सुरक्षा को समर्पित यह संस्था व्यक्ति के मरने के पश्चात भी अपने दायित्व से पीछे हटती नजर नहीं आती। भूखे को भोजन ग्रहण कराने के साथ ही गाय, कुत्ता एवं बंदरों की रोटी का प्रबंध भी यहीं से होता है। अन्नक्षेत्र परिसर में छत पर प्रतिदिन पक्षियों के लिए दाना डाला जाता है, उनके लिए सकोरे में पानी भरकर रखा जाता है। यहां के बारे में मैंने बहुत कुछ सुना था तो सोचा क्यों ना वहाँ जाकर व्यवस्था का जायजा लिया जाए। अन्नक्षेत्र पहुंच वहाँ की व्यवस्था देखी और अन्य सुविधाओं का अवलोकन किया तो इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि संस्था के सेवा कार्यों को शब्दों में बांधना सम्भव ही नहीं है। यहां पीडि़त मानवता व पशु-पक्षियों को लेकर संचालित गतिविधियों का मूल्यांकन कर पाना भी बहुत मुश्किल लगा। अन्नक्षेत्र जनकल्याण समिति के इस सेवाधाम में नर सेवा-नारायण सेवा के आदर्श वाक्य को सही मायने में चरितार्थ होते देखा जा सकता है। सेवाधाम की अद्भुत, असीमित,अतुलनीय और अकल्पनीय गतिविधियों के चलते दानदाता भी बढ़ चढ़कर दान देने हेतु हमेशा तत्पर रहते हैं।
भूखे को भोजन ही सबसे बड़ा पुण्य –
संस्था अध्यक्ष चंद्रप्रकाश ओस्तवाल व सचिव संजय दासोत ने बताया कि भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य का काम माना गया है। इसके चलते हर दिन दोपहर में 12 बजे यहां भोजन खिलाने का कार्य प्रारंभ होता है। अन्नक्षेत्र में भोजन के लिए आने वाले जरूरतमन्दों,असहाय व गरीब लोगों के बैठने के लिए बेंच लगी हुई है। सभी की टेबल पर थालियां रखने के बाद सेवक उनको ताजा खाना परोसने में जुट जाते हैं। खाने में प्रतिदिन बदलाव करते हुए रोटी,दाल, चावल, पड़ी, मिठाई, सेव व बाफले बनाए जाते हैं। सेवादार नि:स्वार्थ भाव से दीन दुखियों से लगाव रखते हुए उनकी सेवा में हाजिर रहते हैं। एक बात यह भी कि समिति केवल अन्नक्षेत्र के अंदर ही निराश्रितों को भोजन ग्रहण करा अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं समझ लेती, बल्कि सरकारी अस्पताल में भर्ती रोगियों के परिवारजनों के लिए भी खाना भेजने का इंतजाम करती है।
मरीजों के परिजनों को भी भोजन –
अन्नक्षेत्र जनकल्याण समिति शासकीय अस्पताल में उपचार हेतु दाखिल मरीजों के परिजनों के लिए चाय-बिस्किट के साथ ही उनको भोजन के पैकेट पहूँचाए जाने का संकल्प भी लिए हुए है। जरूरतमंद लोगों के लिए चौपाटी व बजाजखाना क्षेत्र में भी भोजन के पैकेट वितरित किए जाते हैं। कोरोनाकाल की दोनों लहरों के दौरान भी समिति ने इंसानियत को सर्वोपरि मानते हुए अपने घरों को लौट रहे भूखे-प्यासे मजदूरों के लिए भोजन के पैकेट बनाकर वितरित किए। इतना ही नहीं, अगर किसी के घर-परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए तो यहां शव पेटी के साथ शव सीढ़ी उपलब्ध है। सन्त-महात्मा के देवलोकगमन पर डोल की व्यवस्था है।
वटवृक्ष बन चुका यह सेवाधाम –
पिछले करीबन 65 सालों से अनवरत संचालित इस सेवाधाम ने अब वटवृक्ष का रूप ले लिया है। इसके कर्ताधर्ताओं के परिश्रम और दानदाताओं के सहयोग के फलस्वरूप पीडि़त मानव व मुकबधिरों की सेवा के मामले में इसने नए आयाम स्थापित किए हैं। रावण द्वार स्थित सेवाधाम अन्नक्षेत्र के अंदर पहुंचते ही आपको शांत वातावरण का अनुभव होगा। यहां शोरगुल बिलकुल नहीं सुनाई देगा। अन्नक्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी अपने-अपने कार्य में मेहनत, लगन से जुटे हुए दिख जाएंगे। 


Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

