– उपचार के दौरान पीडि़त की रतलाम में हुई थी मौत
जावरा। भाई दुज पर अपनी बहन के घर से मिलकर वापस अपने गांव आने के दौरान मोटर सायकल को पीछे से टक्कर मारक र घायलों को छोड़ कर भागने वाले ट्रैक्टर चालक को न्यायालय ने दोषी पाते हुए प्रथम श्रेणी न्यायाधीश रोहित शर्मा ने आरोपी तेजराम पिता स्वरुप निवासी ग्राम बड़ावदा को 1 साल के सश्रम कारावास और 2600 रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
प्रभारी जिला लोक अभियोजन अधिकारी विजय कुमार पारस ने बताया कि 10 नवंबर 2018 को दशरथ पिता अमरा एवं गोविंद पिता गोपाल मोटर सायकल से ग्राम आक्यादेह अपनी मौसी की लडकी के घर भाईदूज पर मिलने गए थे, वापस आने के दौरान मोटर सायकल दशरथ चला रहा था। जावरा-बडावदा के बीच टू लाईन रोड पर ग्राम राजाखेडी के रेवास फंटा पर बिना नंबर का आयशर ट्रैक्टर 380 सिल्वर रंग के चालक ने तेज गति व लापरवाही पूर्वक चलाते हुए मोटर साईकल को पीछे से टक्कर मार दी। जिससे बाईक पर सवार दोनो नीचे गिर गए और घायल हो गए। हादसे में दशरथ के सिर, बांये कंधे पर तथा गोविंद के सिर, पेट व पीछे कमर पर चोट लगी। इस दौरान मोटर सायकल में भी टूट-फूट हुई, एक्सीडेन्ट करने वाला आयशर ट्रैक्टर का चालक अपने ट्रैक्टर को खडा कर उठाने आया, उसे देख अन्य राहगीर भी आए। घायल दशरथ द्वारा ट्रेक्टर चालक का नाम पता पूछने पर ट्रेक्टर चालक ने अपना नाम तेजराम पिता स्वरूप निवासी बडावदी का रहना बताया तथा स्वयं का ट्रेक्टर होना बताया।
र्ईलाज के दौरान हुई थी मृत्यु-
भीड को देखकर ट्रेक्टर चालक ट्रेक्टर लेकर भाग गया। ग्रामीणों की सूचना पर दोनो घायलों को ऐम्बुलेंस से जावरा के सरकारी अस्प्ताल भेजा गया। जहां से दशरथ को रतलाम रैफर कर दिया गया। 11 नवंबर 2018 को ईला ज के दौरान गोविन्द की जिला अस्पताल रतलाम में मृत्यु हो गई। जांच पर से थाना बडावदा पर अपराध धारा 304, 279, 337 भादवि का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। वाहन चालक द्वारा वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रस्तुत नही करने पर मोटयान अधिनियम की धारा 39/19 का ईजाफा किया गया। संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इन धाराओं में लगाया अर्र्थदंड-
पैरवीकर्ता सांगते ने बताया कि प्रथम श्रेणी न्यायालय द्वारा विचारण उपरांत अ भियोजन साक्ष्य को प्रमाणित पाते हुए आरोपी तेजराम पिता स्वरुपजी को धारा 304 ए में दोषसिद्ध पाते हुए 1 वर्ष का सश्रम कारावास व धारा 279, 337 भादवि में 600 रूपयें एवं मोटरयान अधिनियम की धारा 39/192 के अंतर्गत 2 हजार रुपयें के अर्थदंड से दंडित किया गया।

