– बार-बार प्रस्तावित होकर निरस्त हो रहा दौरा, क्या जावरा के सक्रीय विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय को कमजोर साबित करने की साजिश ..? या मुख्यमंत्री ही जावरा आने से कतरा रहे … ?
– एक बार फिर आई दौरे की सूचना, बुधवार को फिर व्यवस्था जुटाने दौड़े जिले के अधिकारी
– बार बार व्यवस्था जुटाने में खर्च हो रही प्रशासनिक ऊर्जा, बर्बाद हो रहा जनता का पैसा
जावरा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जावरा दौरा अब केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस और संदेह का विषय बन चुका है। अब तक करीब चार से पांच बार दौरा प्रस्तावित होकर निरस्त हो चुका है और हर बार की तरह इस बार भी स्थिति असमंजस में है। हर बार दौरे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ जाता है। अधिकारी-कर्मचारी दौड़-भाग करते हैं, निरीक्षण होते हैं, तैयारियां की जाती हैं, लेकिन अंतिम समय पर दौरा निरस्त होने से जनता का पैसा और प्रशासनिक ऊर्जा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
हेलीकॉप्टर उतरने के इंतजार में हेलीपेड –
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुजापुर के समीप बाराखेड़ा में बना हेलीपेड दो माह से अधिक समय से तैयार है। इसके निर्माण में ग्रामीणों को जमीन, रास्तों और दिनचर्या से जुड़ी परेशानियां उठानी पड़ीं, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री का हेलिकॉप्टर वहां नहीं उतरा। ऐसे में यह हेलीपेड़ और ग्रामीण मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के हेलीकॉप्टर की राह देख रहे हैं।
बुधवार को फिर दौड़े एसपी व अपर कलेक्टर –
अब एक बार फिर मुख्यमंत्री के संभावित आगमन की सूचना आई, तो बुधवार को एडीएम वैशाली जैन ने एसडीऍम सुनील जायसवाल , तहसीलदार पारस वैश, नायब तहसीलदार बैभव जैन, नपा सीऍमओ राहुल शर्मा व अन्य अधिकारियो के साथ कॉलेज मैदान का निरीक्षण किया, जहां मुख्यमंत्र की संभावित सभा होना हैं। वहीं एसपी अमित कुमार ने एएसपी विवेकलाल, सीएसपी युवराजसिंह, एसडीओपी संदीप मालवीय के साथ हेलीपेड से लेकर सुजापुर पहाड़ी तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सुजापुर पहाड़ी पर पूर्व सांसद डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय की आदमकद प्रतिमा का अनावरण और उद्यान का लोकापर्ण मुख्यमंत्री को करना हैं। लेकिन सवाल वही है — क्या इस बार भी निरीक्षण केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगा … ?
कहीं राजनीतिक षडयंत्र तो नहीं –
लगातार निरस्त हो रहे दौरों ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। क्या मुख्यमंत्री का जावरा न आना किसी राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है, विरोधियो की कोई चाल है ? ताकि जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय को कमजोर सिद्ध किया जा सके ? या फिर मुख्यमंत्री स्वयं ही किसी कारणवश जावरा आने से कतरा रहे हैं ? जनता के बीच यह चर्चा तेज़ हो गई है कि यदि विधायक की सक्रियता और मांग के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं आ रहे, तो इसके पीछे राजनीतिक संदेश और शक्ति संतुलन की कोई गहरी कहानी जरूर है। अब जावरा की जनता केवल कार्यक्रमों की सूचना नहीं, बल्कि यह जानना चाहती है कि — क्या मुख्यमंत्री वास्तव में जावरा आएंगे या फिर इस बार भी दौरा रद्द होकर राजनीतिक सवालों को और गहरा कर देगा ?
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