– मामला प्रतिबंध के बावजूद भी अवैध कॉलोनी में निर्माण का
– प्रतिबंधित क्षेत्र में पंचायत ने दे दी निर्माण अनुमति, लेकिन किस आधार पर
– पटवारी द्वारा दी गई रिपोर्ट दबाकर बैठे अधिकारी ? नहीं किया नोटिस जारी
– कार्रवाई करने का बोलकर पल्ला झाड़ रहे तमाम अधिकारी
जावरा। जिले में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के तमाम दावों के बीच अब प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की लेटलतीफी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण सीमाओं में प्रतिबंध के बावजूद अवैध कॉलोनियों में निर्माण कार्य लगातार जारी है और जिम्मेदार विभाग सिर्फ कार्रवाई करेंगे कहकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। या यूं कहें की वे कार्रवाई करना नहीं चाहते ?
ताजा मामला ग्राम पंचायत रोजाना अंतर्गत हुसैन टेकरी क्षेत्र का है, जहां एक अवैध कॉलोनी में निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस निर्माण को लेकर संबंधित पटवारी करीब एक माह पहले ही अपनी रिपोर्ट तहसील कार्यालय में सौंप चुका था, ताकि निर्माणकर्ता को नोटिस जारी किया जा सके। लेकिन हैरत की बात यह है कि आज तक तहसील कार्यालय से कोई नोटिस जारी नहीं हो पाया।
रिपोर्ट दब गई या कार्रवाई जानबूझकर रोकी गई ? –
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक महीने से तहसील स्तर पर कार्रवाई क्यों अटकी हुई है ? क्या रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई है ? या फिर अवैध निर्माणकर्ताओं को खुली छूट देने के लिए कार्रवाई जानबूझकर रोकी जा रही है ? इधर, जिस क्षेत्र में निर्माण पर प्रतिबंध बताया जा रहा है, वहीं ग्राम पंचायत स्तर से निर्माण अनुमति जारी होने का मामला भी संदेह के घेरे में है।
प्रतिबंध के बाद भी पंचायत ने कैसे दे दी अनुमति ? –
रोजाना पंचायत सचिव प्रभुनाथ शिकारी से जब पुछा गया तो उन्होने बताया कि पंचायत ने मकान निर्माण की अनुमति जारी की हैं, लेकिन अनुमति आवेदन के साथ संलग्र नक्शे में मकान हैं, व्यावायिक काम्पलेक्स हैं, होटल हैं या अनुमति में बेसमेंट निर्माण भी हैं, इसको लेकर वे कोई जवाब नहीं दे पाए। सूत्रों के अनुसार पंचायत ने संबंधित निर्माण के लिए मकान निर्माण की अनुमति जारी की है, जबकि मौके पर बेसमेंट सहित व्यवसायिक निर्माण किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में पंचायत ने आखिर किस अधिकार से अनुमति दी ?
पंचायत को भी नहीं किया नोटिस जारी –
इतना ही नहीं, प्रतिबंध के बावजूद भी अवैध कॉलोनी में मकान निर्माण की अनुमति के अधिकार नहीं होने के बाद भी निर्माण की अनुमति दिए जाने के इस मामले में अब तक एसडीएम द्वारा संबंधित पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। जबकि मामला सामने आने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
जमीन पर निर्माण तेज, फाइलों में कार्रवाई गायब –
प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही लापरवाही और लेटलतिफी के चलते धरातल पर निर्माण कार्य लगातार जारी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी केवल जांच और कार्रवाई का आश्वासन देते दिखाई दे रहे हैं। हालात यह हैं कि विभागों के बीच जिम्मेदारी टाली जा रही है और इसका सीधा फायदा अवैध कॉलोनाइजर उठा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल –
जब पटवारी रिपोर्ट दे चुका हैं, तो अब तक नोटिस क्यों जारी नहीं हुआ ? जब प्रतिबंध पहले से लागू है तो निर्माण की अनुमति पंचायत ने किस आधार पर दी गई ? जब निर्माण खुलकर नजर आ रहा है तो फिर कार्रवाई आखिर कौन रोक रहा है ? या यू कहें कि क्या प्रशासनिक सुस्ती की आड़ में अवैध कॉलोनियों को दोबारा बसने दिया जा रहा है ? सवाल तो कई हैं लेकिन कार्रवाई शून्य हैं ।

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