– इकबालगंज दशहरा मैदान में उमड़ा जनसैलाब, राम-रावण की सेना के बीच हुआ प्रतीकात्मक युद्ध, हनुमानजी ने किया लंका दहन
– परंपरा अनुसार नीतिराज भारतसिंह ने तलवार से किया रावण का वध
जावरा। अहंकार कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंतत: विजय सत्य और धर्म की ही होती है। इसी संदेश के साथ मंगलवार शाम जावरा में विजयादशमी का पर्व उत्साह, उमंग और धार्मिक उल्लास के बीच मनाया गया। शहर के तीन स्थानों पर रावण दहन के आयोजन हुए, इकबालगंज मेला मैदान पर आयोजित मुख्य समारोह में 51 फीट ऊंचे रावण तथा 31-31 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन आकर्षण का केंद्र रहा। जैसे ही प्रभु श्रीराम के अग्निबाण ने रावण के पुतले को निशाना बनाया, आतिशबाजी के बीच बुराई के प्रतीक दशानन का अंत हो गया और पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
श्री दशहरा उत्सव समिति एवं नगर पालिका परिषद जावरा के संयुक्त आयोजन में परंपरा, आस्था और आधुनिक डिजिटल आतिशबाजी का अनूठा संगम देखने को मिला। रावण दहन से पहले भगवान श्रीराम की सवारी निकाली गई, प्रतीकात्मक युद्ध हुआ और हनुमानजी ने लंका दहन कर रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
लक्ष्मीनारायण मंदिर से निकली श्रीराम की सवारी, बाजार में हुआ स्वागत –
दशहरा उत्सव के तहत ताल नाका स्थित तेलीगली के श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर से भगवान श्रीराम की सवारी निकाली गई। सवारी शहर के प्रमुख बाजारों से होते हुए इकबालगंज दशहरा मैदान पहुंची। यहां विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय, नीतिराजसिंह, डॉ. हमीरसिंह राठौर, बलवंतसिंह राठौर गोंदी शंकर, हरिनारायण अरोड़ा एवं दशहरा उत्सव समिति के सदस्यों ने सवारी का स्वागत किया। इस दौरान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमानजी और रावण की वेशभूषा में आए कलाकारों के साथ दोनों सेनाओं का भी पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया। मैदान में धार्मिक उत्साह और उत्सव का माहौल नजर आया।
राम-रावण की सेनाओं में प्रतीकात्मक युद्ध, हनुमानजी ने जलाई लंका –
श्रीराम की सवारी के दशहरा मैदान पहुंचने के बाद रामायण के युद्ध प्रसंग का प्रतीकात्मक मंचन किया गया। श्रीराम और रावण की सेनाओं के बीच सांकेतिक युद्ध हुआ। इसके बाद हनुमानजी ने प्रतीकात्मक लंका दहन किया। इस दृश्य ने उपस्थित लोगों को रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाई, जिसमें अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय का संदेश मिलता है। रामजी की सवारी को रावण के पूतले के पास ले जाया गया और सांकेतिक वध करवाया गया।
तलवार से रावण की नाभि पर वार, फिर श्रीराम के अग्निबाण से हुआ दहन –
समारोह का मुख्य आकर्षण रावण वध और पुतला दहन रहा। परंपरा के अनुसार, नीतिराज भारतसिंह ने तलवार से रावण की नाभि पर वार कर उसके वध की रस्म निभाई। इसके बाद श्री लक्ष्मण ने मेघनाद के पुतले पर तीर चलाया, जबकि प्रभु श्रीराम ने कुंभकर्ण और रावण के पुतलों पर अग्निबाण चलाए। अग्निबाण लगते ही तीनों पुतले आग की लपटों में घिर गए। डिजिटल आतिशबाजी ने आयोजन को और आकर्षक बना दिया। रावण दहन के साथ ही मैदान में मौजूद लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया।
जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और समिति सदस्यों की रही मौजूदगी –
आयोजन के दौरान दशहरा उत्सव समिति के राजेश शर्मा, नंदकिशोर महावर, महेश सोनी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहम्मद युसूफ कड़पा, नगर पालिका उपाध्यक्ष सुशील कोचट्टा, पार्षद रजत सोनी, कान्हा हाड़ा, लोकेश विजवा, पप्पू चारोडिया, राजेश धाकड़, अनिल मोदी, तेजसिंह कदम, सोनू अहेरिया, चन्द्रप्रकाश सोलंकी, युवा नेता प्रांजल पांडेय, अजय सकलेचा, मोहन पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, मुनिराजसिंह चंद्रावत और भोजराजसिंह परिहार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से सीएसपी युवराजसिंह चौहान, नगर पालिका सीएमओ चन्द्रशेखर सोनिस, शहर थाना प्रभारी मनोज कटारिया, औद्योगिक क्षैत्र थाना प्रभारी सुमित मिश्रा के साथ नगर पालिका, राजस्व एवं पुलिस विभाग का अमला मौजूद रहा। दशहरा उत्सव ने दिया अहंकार त्यागने और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश। रावण दहन के साथ जावरा में विजयादशमी का उल्लास छाया रहा। आयोजन ने एक बार फिर याद दिलाया कि शक्ति और वैभव से बड़ा सत्य, मर्यादा और धर्म होता है।
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