– कनेक्शन के नाम पर 45 से 55 हजार की अवैध वसुली, रसीद केवल 5 हजार की
– आरटीआई के सवालों को भी बता दिया काल्पनिक, जवाबदेही से झाडा पल्ला
– अवैध कॉलोनी बनाम बिजली कंपनी, नियम कम, वसूली बेशुमार
जावरा। बिजली अब उजाले का साधन नहीं, बल्कि लूट का हथियार बनती जा रही है। वैध और अवैध कॉलोनियों के नाम पर बिजली कंपनी द्वारा अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड अब खुलकर सामने आ गए हैं। जहाँ वैध कॉलोनी में 3 केवीए के नए बिजली कनेक्शन के लिए महज रुपए 5000 लिए जा रहे हैं, वहीं अवैध कॉलोनियों में उसी बिजली को स्थायी करने के नाम पर उपभोक्ताओं से रुपए 45,000 से 55,000 तक की अवैध वसूली की जा रही है। और हैरानी की बात यह है कि रसीद केवल रुपए 5000 की ही दी जा रही है, शेष रकम किस जेब में जा रही है—इसका कोई हिसाब नहीं !
अस्थायी कनेक्शन भी बना वसूली का जरिया –
बिजली कंपनी द्वारा शहर की अवैध कॉलोनियों में अस्थायी कनेक्शन के लिए भी रुपए 15,000 वसूले जा रहे हैं, लेकिन रसीद यहाँ भी सिर्फ रुपए 5000 की ही दी जा रही हैं। यानी नाम चाहे स्थायी हो या अस्थायी—वसूली स्थायी है और जवाब अस्थायी ! स्थायी और अस्थायी कनेक्शन की दरों में भी आसमान-जमीन का फर्क है, लेकिन इस फर्क का कोई लिखित नियम, कोई अधिसूचना, कोई स्पष्ट गाइडलाइन उपभोक्ताओं को नहीं दी जा रही।
2 हजार फीट दूर से केबल, खर्च उपभोक्ता का –
इतना ही नहीं, बिजली कनेक्शन के लिए करीब 2000 फीट दूर से केबल डालने का खर्च भी उपभोक्ताओं पर थोप दिया गया। ऐसे में ना बिजली कंपनी पोल लगाएगी, ना आधारभूत सुविधा देगी, बांस के सहारे तार डालो और जोखिम भी खुद उठाओ ! ऐसे में शहर की कई अवैध कॉलोनियां हैं, जहां बिजली के ताल झुलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आरटीआई में सवाल पूछे तो सवाल ही बता दिए ‘काल्पनिक ‘-
उपभोक्ताओं ने जब बिजली कंपनी के अधिकारियों से सवाल पुछे तो उन्होने कोई जानकारी नहीं दी, जब परेशान उपभोक्ताओं ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सवाल पूछे, तो बिजली कंपनी ने सवालों को ही काल्पनिक करार दे दिया। यानी न जवाब देना है, न जवाबदेही निभानी है।
अनोखा विरोध : आधे कपड़े उतार कर किया प्रदर्शन –
जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो बहादुरपुर रोड स्थित कॉलोनीवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होने जन संघर्ष समिति के असलम मेव के नेतृत्व में बिजली कंपनी के एई संजय खरत के खिलाफ उपभोक्ताओं ने आधे कपड़े उतारकर अनूठा और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन केवल बिजली के लिए नहीं था, यह सम्मान, अधिकार और जवाबदेही की मांग थी। अब सवाल सिर्फ बिजली का नहीं, सिस्टम की नीयत का है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अंधेरा सिर्फ कॉलोनियों में नहीं—पूरे सिस्टम में फैल जाएगा। प्रदर्शन के दौरान अली जमान, भेरुलाल नेका, मदन माली, कमलेश वीर, इरफान, दानिश हुसैन आदि सहित कई उपभोक्ता मोजुद रहे।
सवाल जो जवाब मांगते हैं –
– रुपए 45 से 55 हजार की वसूली किस नियम के तहत ?
– रुपए 5000 से ज्यादा की रकम की रसीद क्यों नहीं ?
– अवैध कॉलोनी के नाम पर कब तक उपभोक्ताओं को लूटा जाएगा ?
– आरटीआई को काल्पनिक बताने का अधिकार किसने दिया ?
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