– दीप प्रज्वलन, गुरु पूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रेरक संदेशों के बीच विद्यार्थियों ने गुरुजनों के प्रति व्यक्त की कृतज्ञता
जावरा। कश्मीरी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रभात परिहार (पूर्व आचार्य) एवं अध्यक्ष अनिल पावेचा (विवेक भारती शिक्षण समिति के वरिष्ठ सदस्य) द्वारा माँ सरस्वती, प्रणवाक्षर ॐ एवं माँ भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर गुरु पूजन के साथ किया गया।
प्रधानाचार्य शीला जैन दीदी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता एवं गुरुजनों की आज्ञा का पालन करने, समय एवं अनुशासन का महत्व समझने, मन लगाकर अध्ययन करने तथा परिवार और विद्यालय का नाम रोशन करने का संकल्प दिलाया। अतिथियों का स्वागत वंशिका पँवार, दिव्यांशी जटिया, प्रियल जैलवाल, उर्वशी पाटीदार एवं आराध्या सुथार ने किया।
अतिथियों ने दी शुभकामनाएं –
मुख्य अतिथि प्रभात परिहार ने विद्यार्थियों को आचार्य-दीदी की आज्ञा का पालन करने, समय का सदुपयोग करने और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढऩे का संदेश दिया। वहीं कार्यक्रम के अध्यक्ष अनिल पावेचा ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया और विद्यार्थियों को जीवन में निरंतर आगे बढऩे की सीख दी।
विभिन्न वेषभुषा में दी प्रस्तुति –
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गुरु पूर्णिमा पर आधारित गीत, भजन, प्रेरक प्रसंग एवं आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। विशेष आकर्षण महर्षि वशिष्ठ–श्रीराम, महर्षि सांदीपनि–श्रीकृष्ण, द्रोणाचार्य–अर्जुन, समर्थ रामदास–शिवाजी तथा चाणक्य–चंद्रगुप्त की गुरु-शिष्य वेशभूषा रही, जिसमें शिष्यों द्वारा अपने गुरु का पूजन कर भारतीय संस्कृति की अनुपम झलक प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों ने विद्यालय की सभी आचार्य-दीदियों का सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन नितेश पाटीदार, कृतिका जटिया एवं सुहानी ब्रजवासी ने किया, जबकि नीलम रैकवार दीदी ने आभार व्यक्त किया।

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