– उज्जैन के बडऩगर में दिल दहला देने वाला हादसा
– सीएम डॉ. मोहन यादव ने जताया शोक, 4 लाख सहायता के निर्देश
बडऩगर। उज्जैन जिले के बडऩगर तहसील के झलारिया गांव में 3 वर्षीय मासूम भागीरथ की बोरवेल में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। करीब 22 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। नन्हे भागीरथ की मौत के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए परिजनों को आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं।
गुरुवार शाम करीब 7.30 बजे मासूम खेलते-खेलते खुले बोरवेल में गिर गया। बताया जा रहा है कि मां ने उसे गिरते हुए देखा, जिसके बाद गांव में हड़कंप मच गया और तत्काल प्रशासन को सूचना दी गई।
हर संभव कोशिश, लेकिन नाकाम रहा रेस्क्यू –
सूचना मिलते ही मौके पर प्रशासन और राहत दल तुरंत पहुंचे, NDRF और SDRF की टीमों ने मोर्चा संभाला, बच्चे तक पहुंचने के लिए समानांतर गड्ढा भी खोदा गया, लगातार 22 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा, इसके बावजूद मासूम को जिंदा नहीं बचाया जा सका।
उम्मीद जगाने वाला वीडियो, लेकिन टूटी आस –
शुक्रवार दोपहर एक वीडियो सामने आया, जिसमें बच्चा धुंधला नजर आ रहा था। उसका सिर और हाथ दिख रहे थे, लेकिन शरीर में कोई हरकत नहीं थी। परिजन और मौके पर मौजूद लोग आखिरी सांस तक उम्मीद लगाए रहे, लेकिन जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तो वह बेजान था। रेस्क्यू के बाद चिकित्सकों ने परीक्षण किया और मासूम को मृत घोषित कर दिया, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने जताया शोक, 4 लाख की सहायता –
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने पीडि़त परिवार को 4 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान किए जाने के निर्देश दिए।
हादसे के बाद उठा बड़ा सवाल –
अब बड़ा सवाल यह है कि कब बंद होंगे ‘मौत के बोरवेल’ ? यह हादसा एक बार फिर सिस्टम और लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक खुले बोरवेल मासूमों की जान लेते रहेंगे ? क्या हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन ?

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