– आंगनवाड़ी भर्ती में बड़ा खेल! एक ही रोल नंबर, दो मार्कशीट — जावरा केस में स्नढ्ढक्र की तैयारी
जावरा/रतलाम। मध्यप्रदेश की आंगनवाड़ी भर्ती 2026 अब एक बड़े घोटाले की शक्ल लेती जा रही है। रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक के ग्राम केरवासा में सामने आए मामले ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेरिट सूची में 85.2 प्रतिशत अंक दिखाकर प्रथम स्थान पर रखी गई आवेदिका के वास्तविक अंक सिर्फ 57.6 प्रतिशत पाए गए, और अब इस पूरे मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी अंकिता पाटीदार ने खुद थाना जावरा शहर पर उपस्थित होकर फर्जी मार्कशीट के आधार पर चयन का प्रयास करने पर प्रकरण दर्ज करने की सिफारिश कर दी है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले को सबसे पहले Jaora Headlines ने उठाया था, जिसके बाद यह फर्जीवाड़ा धीरे-धीरे उजागर हुआ और अब मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है।
JaoraHeadlines के खुलासे के बाद सामने आया सच –
JaoraHeadlines द्वारा सबसे पहले मेरिट सूची में गड़बड़ी को उजागर किया गया, जिसमें 85 प्रतिशत अंक दिखाकर आवेदिका को टॉपर बनाया गयाl जबकि वास्तविक अंक 57 प्रतिशत के आसपास पाए गए ? इसके बाद ही पूरे मामले की जांच शुरू हुई और अब आधिकारिक स्तर पर फर्जीवाड़ा स्वीकारते हुए एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।
दो रिकॉर्ड, दो सच्चाई — 85 प्रतिशत बनाम 57 प्रतिशत का खेल –
जांच में सामने आया कि आवेदिका ने ऑनलाइन आवेदन में जो अंकसूची अपलोड की थी उसमें 426/500 (85.2 प्रतिशत) अंक थे, जबकि वास्तविकता में आवेदिका के अंक 288/500 (57.6 प्रतिशत) ही हैं। इसका खुलासा भी आवेदिका द्वारा चयन पोर्टल पर दर्ज अंकसूची से निकाले गए रोल नंबर से एमपी बोर्ड और डीएलईएड की प्रवेश आवेदन वेब साईट पर डाले गए थे तो उसमे भी आवेदिका के नंबर 57.6 प्रतिशत ही थे। वहीं JaoraHeadlines के खुलासे के बाद जब दूसरे नंबर की आवेदिका ने भी आपत्ती दर्ज की तो प्रथम स्थान वाली आवेदिका की दो अंक सूची सामने आई। दोनों में नाम और रोल नंबर एक, लेकिन अंक अलग-अलग थे, यही बना सबसे बड़ा सबूत बना।
मीडिया एक्सपोज़ + आपत्ति = खुला पूरा मामला –
मीडिया एक्सपोज के बाद द्वितीय स्थान की अभ्यर्थी ने आपत्ति दर्ज की JaoraHeadlines ने मुद्दा उठाया, दस्तावेजों की जांच हुई और फर्जीवाड़ा सामने आ गया। यानी मीडिया और आपत्ति—दोनों ने मिलकर मामला उजागर किया। आपत्ती उपरांत प्रथम स्थान वाली आवेदिका परियोजना अधिकारी कार्यालय पहुंची और एक आवेदन दिया। जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल की असली अंक सूची और पोर्टल पर अपलोड की गई अंक सूची भी सामने आई। तो बड़ा खुलासा हुआ। असली अंक सूची में केवल एक विषय में डिस्टिंग थी और कुल अंक 500 मे से 288 थे, लेकिन जो अंक सूची पोर्टल पर अपलोड की गई थी, उसमें सभी विषयों में डिस्टिंग और कुल अंक 500 मे से 426 थे।
फर्जी अंकों से बनी टॉपर, मेरिट में 67.6 अंक –
फर्जी अंक के आधार पर आवेदिका को 67.6 मेरिट अंक मिले और उसे प्रथम स्थान दे दिया गया। मामले में परियोजना अधिकारी अंकिता पाटीदार ने कहा कि जावरा ग्रामीण के अंतर्गत आंगनवाडी कार्यकर्ता के 2 एवं आंगनवाडी सहायिका के 10 रिक्त पदों की पूर्ति हेतु आवेदन ऑनलाईन आमंत्रित किए थे। ग्राम केरवासा में एक रिक्त पद के लिए करीब 41 आवेदकों ने पोर्टल पर आवेदन भरे थे, सभी अभ्यर्थियों द्वारा पोर्टल पर हो जो भी दस्तावेज व हायरसेकेण्डरी की अंक सूची अपलोड की गई थी, उसी आधार पर गणना कर मेरिट तैयार कर अनअंतिम सूची जारी की गई थी। वहीं आपत्ती के लिए भी समय रखा गया था। मामले के मीडिया एक्सपोज होने तथा अनंतिम सूची जारी होने के बाद द्वितीय क्रम पर प्रतिक्षारत आवेदिका ने प्रथम स्थान वाली आवेदिका की 12वी मार्कशीट में अकों की गलत गणना होने संबन्धित आपप्ति दर्ज की गई। जिसके बाद प्रथम स्थान वाली आवेदिका ने कार्यालय में उपस्थित होकर लिखित आवेदन प्रस्तुत कर कक्षा 12 वी की मार्कशीट की छायाप्रति प्रस्तुत की जिसमें नाम व रोल नंबर 294402856 आदि लेख है। जिसमें विषयवार प्राप्तांक एवं कुल प्राप्तांक 288 का लेख है। वहीं आवेदिका द्वारा नियुक्ति हेतु ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन भरते समय अपलोड मार्कशीट और बाद में कार्यालय प्रस्तुत की छायाप्रति में नाम रोल नम्बर एक जैसे होकर विषयवार एवं कुल प्राप्तांकों में भिन्नता है। ऐसे में फर्जी अंक सूची लगाकर उक्त आवेदिका ने प्रथम स्थान पाते हुए विभाग के साथ ही धोखाधड़ी की हैं। इससे अन्य योग्य उम्मीदवारों के साथ सीधा अन्याय हुआ हैं।
एफआईआर के आदेश, अब कानूनी कार्रवाई तय –
परियोजना अधिकारी पाटीदार ने बताया कि इस विषय में अनुविभागीय अधिकारी सुनिल जायसवाल को अवगत करवाया गया, जिस पर एसडीएम ने उक्त आवेदिका पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। जिसके परिपालन में जावरा शहर थाने पर उपस्थित होकर आवेदिका पर कूटरचित (फर्जी) मार्कशीट का उपयोग कर छलपूर्वक पद पाने का प्रयास किया गया। वहीं आवेदिका द्वारा गलत अंक सूची अपलोड किए जाने के चलते गलत मेरिट बनी, ऐसे में विभाग की छबी भी धुमिल हुई हैं। ऐसे में आवेदिका पर धोखाधड़ी और कुटरचित दस्तावेज बनाकर पद पाने के प्रयास पर प्रकरण दर्ज करने हेतु पत्र सौंपा गया हैं। पत्र के साथ मूल अंक सूची व पोर्टल पर दर्ज अंक सूची के साथ अन्य आवश्यक दस्तावेज भी संलग्र किए हैं।
सिस्टम पर बड़ा सवाल : क्या और भी ऐसे केस हैं ?
JaoraHeadlines के इस खुलासे के बाद अब सवाल और बड़े हो गए हैं क्या अन्य गांवों में भी इसी तरह की गड़बड़ी है ? क्या पूरे जिले की मेरिट सूची की जांच होगी ? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी ? परियोजना अधिकारी द्वारा शहर थाने पर दिए आवेदन के बाद क्या आवेदिका पर एफआईआर दर्ज होगी या मामले को दबा दिया जाएगा ?
प्रदेश स्तर पर असर : हजारों भर्तियों की विश्वसनीयता पर खतरा –
मध्यप्रदेश में हजारों पदों पर भर्ती जारी हैं। रतलाम में 100+ पद पर भर्ती होना हैं। जब एक केस ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया तो क्या अब पूरे प्रदेश में ऐसी गड़बडी की आंशका से इंकार नहीं किया जा सकता हैं। यह मामला अब साफ कर चुका है कि अगर JaoraHeadlines यह मुद्दा नहीं उठाता, तो शायद यह फर्जीवाड़ा दबा रह जाता। अब यह सिर्फ एक केस नहीं, पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है।

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