- खेत में खड़ी सोयाबीन की फलियां बारिश से हुई अंकुरित
जावरा/पंंचेवा : प्रदेश भर में चल रही लगातार बारिश से नदी नाले उफान पर आ गए छोटे बड़े सभी तालाब लबालब भर गए कई खेत भी तालाब बन गए है, खेतों में खड़ी सोयाबीन लगातार पानी मिलने से गलने लगी है, ऐसे में जल्दी पकने वाली वैरायटी 9560, 1040, 7322 जो सोयाबीन 80 से 90 दिन में पक कर तैयार होती हैं। करीब 25 जून के आसपास जावरा विधानसभा के कई गावों जिनमें पंचेवा, माऊखेड़ी, सुखेड़ा, रांकोदा तथा आसपास के कई ग्रामीण अंचलों में बुआई कार्य प्रारंभ हो गया था। ऐसे में यह फसल करीब ८५ दिनों में पककर तैयार हो गई थी। लेकिन बीते १३ से १८ सितम्बर हुई अतिवृष्टि के चलते खेतों में खड़ी यह सोयाबीन नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है।
पुन: अंकुरित हो गई फलियां –
अतिवृष्टि के चलते खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल की फलियों में फिर से अंकुरण होना चालू हो गया है। किसान प्रफुल्ल व्यास, तेजराम जाट, संतोष राठौड़, चांदुखां मंसूरी, राजू राठौड़, पवन पाटीदार तथा घनश्याम माली आदि ने जब किसानों ने जब 18 सितंबर को अपने-अपने खेतों में जाकर वहां देखा तब उन्हें फसल देखकर हैरानी हो गई की सोयाबीन की फलियों के अंदर से दोबारा बीज अंकुरित होने लगा और बड़े-बड़े अंकुर बाहर आ गए। जिससे यह सोयाबीन की फसल अब खराब होने लगी है।
किसानों ने की सर्वे की मांग –
पानी बंद होने के बाद खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल काटने का कार्य चालू होगा तब अंकुरित हुए बीज व सोयाबीन उसमें खराब मात्रा में निकलेंगे जो की अच्छी खड़ी फसल को भी अपने साथ खराब कर देंगे। क्षैत्र कि किसानों ने कृषि विभाग अधिकारियों के साथ पटवारी एवं तहसीलदार से जल्दी पकने वाली फसल की वैरायटी का सर्वे करवाने की मांग की है।

