– ‘Think – Research – Innovate’ की थीम पर हुआ यंग पॉलिसी मेकर्स कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन
– मिशन स्वदेश से लेकर आरक्षण और श्वरूढ्ढ व्यवस्था तक पर विद्यार्थियों ने किया मंथन
जावरा। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को देश की नीतियों, सामाजिक समस्याओं और उनके समाधान से जोडऩे की अनूठी पहल जावरा पब्लिक स्कूल में देखने को मिली। यहां 2 नवंबर 2026 को ‘यंग पॉलिसी मेकर्स कॉन्क्लेव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘Think – Research – Innovate’ रही, जबकि इसका प्रेरणादायी विचार था – “If Not Now, Then When? If Not Us, Then Who?”। कॉन्क्लेव का उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, शोध कौशल, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक चिंतन विकसित करना था, ताकि वे केवल समस्याओं पर सवाल उठाने वाले नहीं, बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाले जिम्मेदार नागरिक बन सकें। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंध निदेशक कमल मूणत एवं प्राचार्य डॉ. पीयूष मूणत उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्व तेजराम मांगरोदा एवं सोनाली जैन ने शिरकत की।
आलोचना नहीं, समाधान की सोच विकसित करें : प्राचार्य –
प्राचार्य डॉ. पीयूष मूणत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी व्यवस्था की कमियों पर केवल आलोचना करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि उन कमियों को समझा जाए और उनके बेहतर विकल्प तलाशे जाएं। सकारात्मक प्रश्न पूछना और समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना ही वास्तविक बदलाव की शुरुआत है।
देश की तुलना करने से पहले उसके विकास में अपना योगदान समझें –
अतिथि तेजराम मांगरोदा ने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रश्न उठाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों से अपने देश की तुलना करने के बजाय हमें यह सोचना चाहिए कि देश को आगे बढ़ाने में हमारा स्वयं का क्या योगदान हो सकता है। राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश की कमियों को समझना और उनके सुधार के लिए प्रयास करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
मिशन स्वदेश से लेकर आरक्षण और श्वरूढ्ढ व्यवस्था तक पर हुआ मंथन –
कॉन्क्लेव में विद्यालय के चारों सदनों के विद्यार्थियों ने अलग-अलग समूहों में महत्वपूर्ण विषयों पर शोध आधारित प्रस्तुतियां दीं। इनमें प्रमुख रूप से मिशन स्वदेश, मिशन निर्माण, नागरिक शिष्टाचार (Civic Sense), खाद्य गुणवत्ता की जांच, आरक्षण नीति तथा EMI एवं ऋण व्यवस्था जैसे विषय शामिल रहे। विद्यार्थियों ने इन विषयों पर समस्या की पहचान, भारतीय संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता, उपलब्ध आंकड़ों एवं तथ्यों का विश्लेषण, सरकारी योजनाओं की समीक्षा और उनके क्रियान्वयन में मौजूद कमियों पर विस्तार से विचार रखे। साथ ही समस्याओं के व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत किए।
विद्यार्थियों ने दिखाई भविष्य के नीति निर्माताओं जैसी सोच –
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल समस्याओं को गिनाने के बजाय उनके पीछे के कारणों को समझने और समाधान तलाशने पर जोर दिया। उनकी प्रस्तुतियों में शोध, तार्किक विश्लेषण, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की स्पष्ट झलक दिखाई दी। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में जागरूक नागरिकता, लोकतांत्रिक मूल्यों, नीति निर्माण की समझ और जिम्मेदार नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कॉन्क्लेव ने यह संदेश दिया कि विद्यार्थी केवल देश का भविष्य नहीं हैं, बल्कि वर्तमान में भी सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। जावरा पब्लिक स्कूल की यह पहल शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे ले जाकर सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जोडऩे का सराहनीय प्रयास रही।

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