– कोच डिस्प्ले नहीं होने से बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और बीमार यात्री परेशान
– 15 माह से मांग के बावजूद व्यवस्था जस की तस, प्रधानमंत्री और रेलमंत्री तक शिकायत
– प्लेटफॉर्म-2 पर टिकट खिड़की और हटाए गए प्राचीन शिव मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग भी लंबित
जावरा। मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी तहसील के रुप में पहचान रखने वाला जावरा शहर, यहां रेल सुविधा तो हैं लेकिन जावरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकडऩा यात्रियों के लिए कई बार किसी चुनौती से कम नहीं रहता। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही यात्रियों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि उनका आरक्षित कोच आखिर प्लेटफॉर्म के किस हिस्से में आएगा। स्टेशन पर कोच डिस्प्ले की व्यवस्था नहीं होने के कारण ट्रेन आते ही यात्री अपना कोच तलाशने के लिए एक छोर से दूसरे छोर तक दौड़ लगाते नजर आते हैं।
इस भाग-दौड़ का सबसे ज्यादा खामियाजा बुजुर्ग यात्रियों, महिलाओं, छोटे बच्चों, बीमार और सामान लेकर यात्रा कर रहे यात्रियों को उठाना पड़ता है। ट्रेन कुछ ही मिनट के लिए प्लेटफॉर्म पर रुकती है और इसी कम समय में यात्रियों को अपना कोच ढूंढकर उसमें चढऩा होता है। ऐसे में यदि कोच अपेक्षित स्थान से दूर आ जाए तो परेशानी और बढ़ जाती है।
बच्चे को लेकर ट्रेन के साथ दौड़ता रहा पिता –
जावरा रेलवे स्टेशन की इसी समस्या का एक उदाहरण हाल ही में सामने आया। केसरियाजी तीर्थ राजस्थान जाने के लिए ट्रेन से यात्रा के दौरान एक यात्री ने देखा कि एक छोटा बच्चा अपने पिता के साथ अपने निर्धारित कोच की तलाश में प्लेटफॉर्म पर दौड़ रहा था। ट्रेन चलने से पहले कोच तक पहुंचने की जल्दबाजी में बच्चे और अन्य यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन जाती है। सवाल यह है कि जब आधुनिक रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेन के कोच की स्थिति पहले से बताने के लिए डिस्प्ले लगाए जा रहे हैं, तो जावरा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर यात्री आज भी अपने कोच के लिए ट्रेन के साथ दौडऩे को मजबूर क्यों हैं?
15 माह से मांग, लेकिन यात्रियों को अब भी इंतजार –
यह समस्या नई नहीं है। 20 जुलाई 2025 से जावरा स्टेशन पर कोच डिस्प्ले लगाने की मांग लगातार उठाई जा रही है। मांग-पत्र दिए गए, अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन करीब 15 माह बीत जाने के बाद भी यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिल सकी है। यात्रियों के लिए कोच डिस्प्ले कोई विलासिता की सुविधा नहीं, बल्कि यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाने वाली मूलभूत व्यवस्था है। खासकर ऐसे यात्रियों के लिए जो तेज गति से प्लेटफॉर्म पर नहीं चल सकते, यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है।
प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर टिकट खिड़की का भी अभाव –
यात्रियों की परेशानी सिर्फ कोच तलाशने तक सीमित नहीं है। प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर टिकट खिड़की की सुविधा नहीं होने से भी यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों को टिकट संबंधी आवश्यकता के लिए दूसरे स्थान तक जाना पड़ता है। बुजुर्ग, महिलाएं और सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त दूरी परेशानी बढ़ाती है। यात्रियों का सवाल है कि जब प्लेटफॉर्म नंबर-2 से नियमित रूप से यात्री आवागमन करते हैं, तो वहां आवश्यक यात्री सुविधाएं क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं ?
विस्तारीकरण में हटाया गया प्राचीन शिव मंदिर भी बना सवाल –
प्लेटफॉर्म नंबर-2 के विस्तारीकरण के दौरान हटाए गए प्राचीन शिव मंदिर का पुन: उसी स्थान पर निर्माण कराने की मांग भी सामने आई है। यह मामला केवल निर्माण से जुड़ा नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था से भी जुड़ा हुआ है। यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्टेशन का विकास जरूरी है, लेकिन विकास कार्यों के साथ यात्रियों की सुविधा और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों का भी संवेदनशीलता से समाधान होना चाहिए।
अब अनिल दसेड़ा ने फिर उठाया मामला –
इन समस्याओं को लेकर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने एक बार फिर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि जावरा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की समस्याओं का समाधान लंबे समय से लंबित है और अब इन मामलों में ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। दसेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, पश्चिम रेलवे मुख्यालय चर्चगेट मुंबई, डीआरएम रतलाम तथा सांसद सुधीर गुप्ता को पुन: मांग पत्र भेजकर जनहित से जुड़े इन कार्यों को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है।
रेलवे से सीधा सवाल—आखिर कब मिलेगी सुविधा ? –
जावरा के यात्रियों का सीधा सवाल है कि 15 माह से मांग किए जाने के बाद भी कोच डिस्प्ले के लिए और कितना इंतजार करना होगा? क्या यात्रियों को अपना कोच तलाशने के लिए इसी तरह ट्रेन के साथ दौडऩा पड़ेगा ? रेलवे प्रशासन से अपेक्षा है कि यात्रियों की इस समस्या को केवल मांग-पत्र या शिकायत के रूप में न देखकर सुरक्षा और यात्री सुविधा से जुड़े गंभीर विषय के रूप में लिया जाए और जावरा रेलवे स्टेशन पर कोच डिस्प्ले, प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर टिकट खिड़की तथा प्राचीन शिव मंदिर के पुनर्निर्माण सहित लंबित कार्यों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।
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