जावरा नगर पालिका में जिम्मेदारियों का ‘प्रयोग’ ! दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सौंपे बड़े विभाग, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
– स्वास्थ्य, लोक निर्माण और विद्युत जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के फैसले पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में।
जावरा। नगर पालिका परिषद जावरा में कर्मचारियों के हालिया स्थानांतरण के बाद किए गए विभागीय फेरबदल ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा जारी आदेश में ऐसे दैनिक वेतनभोगी कम्प्यूटर ऑपरेटरों को लोक निर्माण और विद्युत जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में प्रभारी लिपिक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जो नियमित कर्मचारी भी नहीं हैं। वहीं स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारी को दी गई है जो प्रतिदिन मंदसौर से अप-डाउन करता है। इस निर्णय को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
दैनिक वेतनभोगी के भरोसे बड़े विभाग, जवाबदेही किसकी ? –
25 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार नगर पालिका में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया। सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और विद्युत शाखा में प्रभारी लिपिक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दैनिक वेतनभोगी कम्प्यूटर ऑपरेटरों को सौंप दी गई हैं। प्रश्न यह उठता है कि यदि इन विभागों में किसी प्रकार की वित्तीय, तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को प्रशासनिक निर्णयों के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा या फिर स्थायी अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेंगे ?
स्वास्थ्य विभाग की कमान अप-डाउन करने वाले कर्मचारी के हाथ –
नगर पालिका का स्वास्थ्य विभाग शहर की साफ-सफाई, मच्छर नियंत्रण, संक्रमण रोकथाम और आपातकालीन व्यवस्थाओं से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे विभाग की जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारी को सौंपना जो प्रतिदिन मंदसौर से जावरा अप-डाउन करता हो, कई सवाल खड़े करता है। बारिश के मौसम में यदि सड़क या यातायात प्रभावित होता है और प्रभारी समय पर नगर पालिका नहीं पहुंच पाता, तो स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों, सफाई व्यवस्था और आपात स्थितियों पर विपरीत असर पड़ सकता है।
स्थानीय कर्मचारियों की अनदेखी क्यों ? –
नगर पालिका में ऐसे कई स्थानीय कर्मचारी मौजूद बताए जा रहे हैं जो लंबे समय से कार्यरत हैं और आवश्यकता पडऩे पर तुरंत कार्यालय पहुंच सकते हैं। इसके बावजूद उन्हें जिम्मेदारी न देकर बाहर से आने वाले कर्मचारियों को प्रभारी बनाना कर्मचारियों और नागरिकों दोनों की समझ से परे बताया जा रहा है।
क्या नियमों के अनुरूप है यह निर्णय ? –
प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार सामान्यत: नियमित एवं जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों को सौंपा जाता है, ताकि जवाबदेही स्पष्ट रहे। ऐसे में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व देना भविष्य में विवाद और जवाबदेही का संकट खड़ा कर सकता है।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल…
– क्या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभारी बनाना प्रशासनिक दृष्टि से उचित है ?
– यदि किसी विभाग में अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार कौन होगा ?
– स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील विभाग के लिए स्थानीय कर्मचारी की बजाय अप-डाउन करने वाले कर्मचारी को प्राथमिकता क्यों ?
– क्या नगर पालिका प्रशासन ने इस निर्णय के दूरगामी परिणामों पर विचार किया ?
– क्या नगर पालिका प्रशासन इस पूरे मामले पर सफाई देगा, या फिर यह फैसला भी अन्य विवादित आदेशों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा ?


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