– शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
– खाद्य विभाग ने नमूने लेकर जांच के लिए भेजे लेब, रिर्पोट में होगा खुलासा
जावरा। क्षेत्र में दूध कारोबार से जुड़े एक बड़े खेल का खुलासा होने की चर्चा है। भीमाखेड़ी में संचालित एक फैक्ट्री पर प्रशासन ने छापा मारकर उसे सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान करीब 104 कट्टों में भरा 2600 किलो लैक्टोज पाउडर बरामद किया गया। सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री में प्रतिदिन आने वाले दूध की तुलना में बाजार में कहीं अधिक मात्रा में सप्लाई किए जाने की आशंका जताई जा रही है। कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और अब जांच का दायरा शहर की अन्य डेयरियों और अन्य प्लांट तक बढऩे की संभावना भी जताई जा रही है। फैक्ट्री भीमाखेड़ी निवासी यश माली द्वारा संचालित बताई जा रही है।
भीमाखेड़ी स्थित इस फैक्ट्री पर पाउडर से नकली दूध बनाए जाने की शिकायत प्राप्त होने पर आईए थाना प्रभारी प्रकाश गाडरिया ने टीम के साथ भीमाखेड़ी स्थित फैक्ट्री पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान खाद्य विभाग की ज्येाति बघेल और प्रिंती मंडोलिया को भी मौके पर बुलाया गया। बाद में एसडीएम सुनिल जायसवाल और तहसीलदार सहदेव मौरे भी जांच स्थल पहुंचे और पूरी कार्रवाई की निगरानी की।
फैक्ट्री से 104 कट्टे, 2600 किलो लैक्टोज पाउडर बरामद –
छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से लैक्टोज पाउडर के 104 कट्टे बरामद किए गए। प्रत्येक कट्टे में लगभग 25 किलोग्राम पाउडर भरा हुआ था। इस प्रकार कुल करीब 2600 किलोग्राम लैक्टोज पाउडर जब्त किया गया। खाद्य विभाग ने मौके से नमूने लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
आवक से अधिक सप्लाई –
सूत्रों के अनुसार भीमाखेड़ी की इस इकाई में प्रतिदिन ग्रामीण अंचलों से करीब 4 से 5 हजार लीटर दूध की आवक होती थी, लेकिन जब जांच हुई तो यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि आवक से कहीं अधिक लीटर दूध बाजार में इस इकाई द्वारा सप्लाय किया जाता रहा हैं। वहीं बाहर के प्लांट पर भी यहां से बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई होती थी। ऐसे में कम आवक के बाद भी बाजार और बाहरी प्लांट की आपूर्ति किया प्रकार की जाती थी, संभवत: पावडर और केमिकल से नकली दूध बनाकर ही इतनी आपूर्ति होती रही होगी, लेकिन नकली दूध को लेकर जिन बड़े प्लांट्स पर भी यहां से दूध जाता था, क्या उन प्लांट्स संचालकों या वहां कार्यरत कर्मचारियों ने भी कभी इस इकाई के दूध की जांच करना मुनासिब नहीं समझा ? या फिर आपसी सांठगांठ के दम पर ही यह नकली दूध का पूरा खेल खेला जा रहा था। बहरहाल फिलहाल तो प्रशासन ने उक्त फैक्ट्री के सील कर, दूध के सेम्पल लेकर जांच के लिए लेबोरेटरी भेजे हैं, अब आगे की जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर हैं।
क्या डेयरियों और अन्य प्लांट्स पर भी होगी जांच –
भीमाखेड़ी की इस इकाई का दूध जावरा के साथ ही जिले में कहां कहां सप्लाय होता था, किन बड़े प्लांट्स पर यहां से दूध जाता था, उन सभी डेयरियों और प्लांट्स पर भी क्या अब खाद्य विभाग कार्रवाई करेगा। हालाकि प्रशासनकि अधिकारियों और खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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