– जावरा में पूर्व से पदस्थ विधायक प्रतिनिधि और महाविद्यालय की जभास अध्यक्ष भी बने एल्डरमेन
– 5 पुरुषों के साथ 1 महिला को मिला एल्डरमेन का पद
जावरा। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आखिरकार 29 मार्च को प्रदेश की 46 नगर पालिकाओं में एल्डरमेन नियुक्त कर दिए, लेकिन इस फैसले की टाइमिंग अब सवालों के घेरे में है। प्रदेश के साथ ही जावरा नगर पालिका परिषद में भी 6 एल्डरमेन नियुक्त किए गए हैं, जिनमें 5 पुरुष और 1 महिला शामिल हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर पालिका का कार्यकाल साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद अब जाकर ये नियुक्तियां क्यों ? जब कि 2027 में चुनाव भी नजदीक हैं, ऐसे में इस देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अपने ही सरकार में इतनी देरी, क्या है वजह ? –
प्रदेश और केन्द्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद एल्डरमेन की नियुक्ति में इतनी देरी होना आमजन और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए हैरानी का विषय बन गया है। क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर चुनावी गणित का हिस्सा—यह सवाल अब खुलकर उठने लगे हैं।
जावरा में ये बने एल्डरमेन –
जावरा नगर पालिका में जिन नामों पर मुहर लगी है, उनमें पहले से प्रभावशाली और सक्रिय चेहरे शामिल हैं, रविवार को जारी हुई सूचि में पूर्व से नपा में पदस्थ विधायक प्रतिनिधि अजयसिंह भाटी को एल्डरमेन बनाया गया हैं, तो क्या अब इस नियुक्त के बाद विधायक प्रतिनिधि के पद पर किसी अन्य की नियुक्ती होगी या एक ही के पास दोनो जवाबदारी रहेगी। वहीं भगतसिंह शासकीय महाविद्यालय जावरा की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष प्रमोद रावल को भी एल्डरमेन बनाया हैं। ऐसे में अब क्या महाविद्यालय को भी नया जनभागीदारी समिति अध्यक्ष मिलेगा। इन दोनो के साथ वार्ड 01 के पूर्व पार्षद नंदकिशोर महावर, वार्ड 16 के पूर्व पार्षद अजय सकलेचा तथा वार्ड 17 से मनोहर पांचाल, वार्ड 14 से संतोष शर्मा को एल्डरमेन नियुक्त किया गया हैं।
देरी से नियुक्ति, अब क्या होगा फायदा ? –
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कार्यकाल का अधिकांश हिस्सा बीत चुका है, तब इन एल्डरमेन की नियुक्ति से नगर विकास को कितना लाभ मिलेगा ? या फिर यह केवल आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया कदम है ?
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