– करमदी के नमकीन क्लस्टर से शिवगढ़ और सैलाना तक खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, लेकिन क्या जावरा सहित जिले की सभी नमकीन निर्माण इकाइयों की भी होगी जांच ?
– प्रयोगशाला रिपोर्ट और विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें।
रतलाम/जावरा। बाजार में चटपटा नमकीन खरीदते समय उपभोक्ता शायद ही यह सोचता हो कि इसे बनाने में किस प्रकार का तेल इस्तेमाल किया गया है, तेल की गुणवत्ता कैसी है और खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। स्वाद के इस बाजार में सबसे बड़ा सवाल उपभोक्ताओं की सेहत और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की हालिया कार्रवाई ने जिले में नमकीन निर्माण इकाइयों की नियमित और व्यापक जांच की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

पाम ऑयल अपने आप में असुरक्षित नहीं, लेकिन इस्तेमाल के तरीके पर उठते हैं सवाल –
यूं तो रतलाम के साथ ही जावरा में कई नमकीन निर्मात्रा सोयाबीन व मुंगफली के तेल का उपयोग कर नमकीन बनाते हैं, लेकिन इसी नमकीन निर्माण में इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड पाम ऑयल खाद्य तेलों में से एक है। हालांकि, पाम ऑयल में संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) की मात्रा अधिक होती है। इसका अत्यधिक और नियमित सेवन असंतुलित आहार का हिस्सा बनकर हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। वहीं, तेल को बार-बार गर्म करना, लंबे समय तक इस्तेमाल करना और निर्धारित गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करना खाद्य सुरक्षा के गंभीर सवाल खड़े करता है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि केवल पाम ऑयल का इस्तेमाल होने से किसी नमकीन को मिलावटी या असुरक्षित नहीं कहा जा सकता। इसकी वास्तविक गुणवत्ता का आकलन इस्तेमाल किए गए तेल, निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता और प्रयोगशाला जांच के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
करमदी के नमकीन क्लस्टर में निरीक्षण, कई खाद्य पदार्थों के नमूने लिए –
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा करमदी स्थित नवीश फूड नमकीन क्लस्टर में निरीक्षण के दौरान जादूगर नमकीन एवं टू मच पापा फ्राइम्स के नमूने लिए गए। इसके अलावा बालाजी फूड प्रोडक्ट से रिफाइंड पाम ऑयल, नमकीन गठिया और साबूदाना नमकीन के नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान यहां पाम आयल के ड्रम पर गाद जमी हुई मिली, ड्रमों पर मच्छर तेरते मिले, स्वच्छता संबंधी कमियां पाए जाने पर संबंधित फर्म को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के तहत नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रीति मंडोरिया ने शिवगढ़ और सैलाना में भी विभिन्न प्रतिष्ठानों से बेसन, बूंदी, ऑरेंज कैंडी, दाल और सोयाबीन ऑयल के नमूने लिए हैं। सभी नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे जाएंगे और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सवाल यह है कि जांच का दायरा कितना व्यापक होगा ? –
रतलाम जिले में नमकीन का निर्माण और बिक्री करने वाली इकाइयों की संख्या को देखते हुए यह जरूरी है कि खाद्य विभाग अपनी जांच को केवल कुछ प्रतिष्ठानों तक सीमित न रखे। जावरा सहित जिले के सभी प्रमुख बाजारों, नमकीन निर्माण इकाइयों, थोक विक्रेताओं और तेल की आपूर्ति करने वाले प्रतिष्ठानों में जोखिम के आधार पर नियमित निरीक्षण किया जाना चाहिए। विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाला तेल निर्धारित गुणवत्ता का हो, खाद्य पदार्थ स्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किए जाएं और इस्तेमाल किए गए तेल को बार-बार गर्म करके असुरक्षित तरीके से उपयोग न किया जाए। जहां उल्लंघन मिले, वहां नियमों के अनुसार प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
जनहित में उठते पांच बड़े सवाल –
– क्या जावरा सहित रतलाम जिले की सभी प्रमुख नमकीन निर्माण इकाइयों का निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा ?
– क्या नमकीन में इस्तेमाल होने वाले पाम ऑयल और अन्य खाद्य तेलों की गुणवत्ता की नियमित जांच होगी ?
– क्या बार-बार गर्म किए गए तेल और खराब भंडारण की स्थिति की भी जांच की जाएगी ?
– भोपाल भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी ?
– क्या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी?
उपभोक्ताओं की सेहत से समझौता नहीं होना चाहिए –
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच केवल त्योहारों या शिकायतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बाजार में बिकने वाले नमकीन और अन्य खाद्य उत्पादों की नियमित निगरानी, पारदर्शी प्रयोगशाला रिपोर्ट और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, किसी प्रतिष्ठान के उत्पाद को जांच रिपोर्ट आने से पहले दोषपूर्ण घोषित करना भी उचित नहीं होगा। अब देखना यह है कि खाद्य विभाग की यह कार्रवाई आगे चलकर जावरा सहित पूरे रतलाम जिले में व्यापक जांच अभियान का रूप लेती है या नहीं। स्वाद के साथ सेहत की सुरक्षा भी जरूरी है—और इसकी जिम्मेदारी खाद्य कारोबारियों के साथ-साथ निगरानी करने वाले विभाग की भी है।

