– रात में हुआ हादसा, २ नर्स घायल होने से बची
– सुबह जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ ने किया अवलोकन
– लगाए रिनोवेशन में भ्रष्टाचार और कमिशन खोरी के आरोप
जावरा। मध्यप्रदेश की सबसे तहसील का सरकारी अस्पताल काफी पुराना होकर जर्जर हो चुका था, शासन ने इस भवन को राईट ऑफ भी कर दिया था, लेकिन इस भवन को कोरोना काल में रिनावेट किया गया, रिनोवेट कर इसे बाहर से तो सुंदर बना दिया, लेकिन इसकी जर्जरता की मरम्मत नहीं की गई। जवाबदारों द्वारा बगैर मरम्मत के केवल रंग रोगन कर पीवीसी शीट, फायबर शीट और थर्माकॉल लगाकर इसे सुंदर बनाकर इसका कायाकल्प कर दिया। अस्पताल के इस कायाकल्प की पोल बीती रात अस्पताल के नर्स रूम की छत से गिरे प्लास्टर ने खोल दी। छत का प्लास्टर फाईबर की शीटों को तोड़कर सीधा नीचे गिर गया, गनीमत तो यह रही कि नीचे बैठी नर्सो पर यह प्लास्टर नहीं गिरा, कारण नर्से उस स्थान से थोड़ी दूर बैठी थी। बीती रात हुए इस हादसे से यह बात तो स्पष्ट हो गई है कि रिनोवेशन के नाम पर केवल बाहरी सुंदरता पर काम किया गया है, भवन की जर्जरता को लेकर काम नहीं हुआ है, ऐसे में अब अस्प्ताल में काम करने वाले कर्मचारी अपनी जान आफत में लेकर काम करने को मजबूर है।
सुबह पहुंचे जिला पंचायत सदस्य धाकड़, लगाए भ्रष्टाचार के आरोप –
बीती रात हुए इस हादसे की सूचना मिलने के बाद मंगलवार को सुबह जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ सरकारी अस्पताल पहुंचे और नर्स रूम के साथ पूरे अस्पताल का अवलोकन किया। अवलोकन के बाद धाकड़ ने बताया कि अस्पताल में २५ डाक्टर के पद है, लेकिन वर्तमान में १४ ही पदस्थ है, सीटी स्कैन मशीन बीते २ सालों से धुल खा रही है, ऑपरेशन थियेटर सालों से बंद पड़ा है, भवन जर्जर घोषित होने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं करवाई गई, केवल बाहरी रंग रोगन कर फायबर ओर पीवीसी सीट लगाकर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। कमिशन खोरी के इस खेल की शिकायत उच्चाधिकारियों तक की जाएगी, वहीं ३० सितम्बर को सीएम के दौरे पर सीएम से भी इस मामले में चर्चा की जाएगी।अवलोकन के दौरान असलम मेव, कृष्णा धाकड़ आदि भी मौजुद रहे।


