– इंदौर के भगीरथपुरा के बाद अब जावरा भी स्वास्थ्य आपदा की दहलीज पर
जावरा। जिस सड़क से जावरा आने-जाने वाले लगभग सभी ङ्कढ्ढक्क, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक गुजरते हैं, उसी सड़क के किनारे गंदे नाले में पड़ी पेयजल पाइपलाइन प्रशासन की घोर लापरवाही की गवाही दे रही है। शहर के वीआईपी गेस्ट हाऊस तथा राजीव कॉलोनी पहुंचने के प्रमुख इस स्थान पर यह नजारा किसी बम से कम खतरनाक नहीं है, यहां पीने का पानी सीधे नाले के सड़े-गले, जहरीले पानी के बीच से गुजर रहा है।
राजीव कॉलोनी में सामने आई गंदे नाले से गुजरती पेयजल पाइपलाइन अब सिर्फ एक कॉलोनी का मामला नहीं रह गई है। सूत्रों के अनुसार यह पाइपलाइन चौपाटी जनपद पंचायत कार्यालय के समीप बनी मुख्य जल टंकी से जुड़ी हुई है, जिससे राजीव कॉलोनी के साथ-साथ चौपाटी क्षेत्र की कई अन्य कॉलोनियों को भी पानी सप्लाई किया जाता है। अर्थात इस एक पाइपलाइन के दूषित होने से हजारों परिवारों को रोजाना जहर मिला पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा। तस्वीरें साफ बता रही हैं कि पाइपलाइन कीचड़, गंदगी, कचरे और बदबूदार पानी में डूबी हुई है, जिससे हजारों लोगों के घरों तक पहुंच रहा पानी भी क्या अब धीरे-धीरे ज़हर बन चुका है।
इंदौर जैसी त्रासदी की दस्तक –
इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है, जिसके बाद प्रदेश भर में पेयजल पाईप लाईन की जांच व सुधार कार्य प्रारंभ हो चुका हैं, लेकिन जावरा प्रशासन अब भी आंख मूंदे बैठा है। राजीव कॉलोनी में हालात बिल्कुल वही बन चुके हैं, जहां बीमारी, महामारी और मौत किसी भी समय दस्तक दे सकती है। लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा हैं।
शिकायतें, गुहारें, सब बेकार –
रहवासियों ने नगर पालिका के साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायतें कीं, कई बार जनसुनवाई के माध्यम से भी शिकायत की, लेकिन हर बार फाइलें दबा दी गईं। मजबूर होकर नागरिकों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, फिर भी ना पाइपलाइन बदली गई और ना नाले की सफाई हुई।
VIP रोज गुजरते हैं, लेकिन ज़हर नहीं दिखता ? –
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सड़क से यह गंदा नाला और पाइपलाइन गुजर रही है, उसी सड़क से लगभग सभी ङ्कढ्ढक्क और गणमान्य व्यक्ति रोजाना निकलते हैं, फिर भी किसी की नजर इस मौत के जाल पर नहीं जाती।
क्या प्रशासन किसी बड़ी बीमारी या मौत का इंतजार कर रहा है ?-
क्या जावरा को भी भविष्य में इंदौर के भगीरथपुरा जैसी त्रासदी झेलनी पड़ेगी ? जनता अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाब चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में हैजा, पीलिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी महामारी कभी भी फैल सकती है। लोगों का साफ सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बच्चे, बुजुर्ग या परिवार की मौत के बाद ही जागेगा ? क्या जावरा को भी भगीरथपुरा बनना पड़ेगा ? अब जावरा की जनता जवाब चाहती है कि क्या यह सिर्फ तस्वीरों में दिखने वाली गंदगी है, या प्रशासन की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत ?

