– दिवाकर भवन पर चार्तुमास के तहत चल रही धर्मसभा
जावरा। हम आत्मा का सम्मान नहीं करते हैं, हम पदार्थ का सम्मान करते हैं हम जड़ का सम्मान करते रहते हैं। दुनिया में इतना झगड़ा नहीं है जितने दिखाई देते हैं यह झगड़ालू वृत्ति के कारण होते हैं झगड़ा करना इसलिए भी जरूरी हो जाता है कि मेरा नाम हो मेरा फोटो छपे में भीड़ में आगे आ जाऊं व्यक्ति इसलिए झगड़ा करता है। लेकिन अच्छे कार्यों में अपना नाम करो बुरे कर्मों से नाम नहीं होता आज अपने बच्चों के नाम कोई रावण कंस कैकई सुरपंखा नहीं रखता बुराई ने वह सब नाम खराब कर दिए हैं। उर्जा निर्माण कार्य में लगना और विध्वंस से बचाना क्योंकि ऊर्जा कहीं रुकती नहीं ऊर्जा क्रोध में बहेगी तो विध्वंस होगा और लय में बहेगी तो बहार आ जाएगी जो हमारे जीवन को सार्थक और संतुलित बनाने में मदद करती है। जब हम उर्जा निर्माण कार्य में लगे रहते हैं, तो हमारे मन में सकारात्मक विचार आते हैं और हमारा मन सकारात्मकता से भर जाता है।
दिवाकर भवन जावरा पर चार्तुमास हेतु विराजित आगम ज्ञाता ध्यान योगी श्री विकसित मुनि जी म.सा. नवकार मंत्र आराधक श्री वीतराग मुनि जी म.सा.ने धर्मं सभा को संबोधित करते हुए कही। मुनि श्री ने कहा कि उर्जा निर्माण कार्य में लगने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होते हैं। जिस प्रकार सर्प के विष की उर्जा विनाशक है लेकिन यदि इसको दवाई के रूप में उपयोग किया जाए तो अमृत बनाया जा सकता है नाली में बहने वाला पानी गंदा होता है लेकिन फिल्टर के माध्यम से उसमें शुद्धता आ जाती है। उर्जा निर्माण कार्य में लगने से हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। उर्जा निर्माण कार्य में लगने से हमारे रिश्ते भी बेहतर होते हैं और हम अपने परिवार और समाज में एक अच्छा स्थान प्राप्त करते हैं। विध्वंस से बचने से हम नकारात्मक विचारों और भावनाओं से बचे रहते हैं। विध्वंस में समय बर्बाद न करके हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समय का उपयोग कर सकते हैं। विध्वंस में ऊर्जा बर्बाद न करके हम अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाने से मन में शांति और संतुष्टि का विकास कर सकते हैं। उपरोक्त जानकारी देते हुए श्रीसंघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिय़ा एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पुखराज कोचट्टा ने बताया की तपरत्न प्रकाशचंद पीतलिया ने गुरुदेव के पावन मुखारविंद से 54 उपवास अनिता टुकडिय़ा ने 7 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा का संचालन सहमंत्री प्रकाश श्रीश्रीमाल ने किया। आभार कोषाध्यक्ष राकेश जैन ने माना।
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