– लाडली बहनों पर मेहरबानी, लेकिन सरकारी सेवकों के साथ भेदभाव कर रही सरकार
– सेवानिवृत प्राध्यापकों के अर्जित अवकाश नगदीकरण के लिए अब तक नहीं बनाया माड्यूलर
– जब तक माड्यूलर में इंट्री नहीं होगी तब तक नहीं होगा भुगतान
जावरा। प्रदेश के सेवानिवृत 500 से अधिक प्राध्यापकों को उनके अर्जित अवकाश नगदीकरण का लाभ आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग निशांत वरवड़े की लापरवाही के चलते नहीं मिल पा रहा हैं। प्रदेश के कई सेवानिवृत प्राध्यापकों द्वारा सीएम हेल्प लाईन से लेकर लिखित पत्र द्वारा सीएम से लेकर उच्च शिक्षा मंत्रालय तक शिकायत की, लेकिन करीब डेढ़ साल अधिक का समय बीतने के बाद भी अब तक आयुक्त उच्च शिक्षा के कान पर जूं तक नहंी रैंग रही हैं। अर्जित अवकाश नगदीकरण के लिए आयुक्त को मंत्रालय द्वारा एक माड्यूलर बनाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक ना तो माड्यूलर बना हैं, और ना ही उसमें इंट्री दर्ज हो सकी हैं, ऐसे में प्रदेश के सेवानिवृत प्राध्यापकों की मेहनत का करोड़ा रुपया सरकार ने अटका कर रखा हैं। जबकि सरकार हर माह लाड़ली बहनों को तो मुफ्त में पैसा बांट रही हैं, लेकिन सालों तक शासन की सेवा करने के बाद भी प्राध्यापकों को उनकी ही राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा हैं।
जावरा निवासी तथा शासकीय कन्या स्नातकोतर महाविद्यालय रतलाम से सहप्राध्यापक अर्थशास्त्र पद से सेवानिवृत हुए डॉ. मदनलाल गांगले ने बताया कि उच्च शिक्षा सचिव मंत्रालय द्वारा प्रदेश के 500 से अधिक सेवानिवृत प्राध्यापकों के अर्जित अवकाश नगदीकरण बिलों के भुगतान के लिये आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग को एक मॉड्यूलर बनाने के आदेश दिये थे। लेकिन आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक कोई काम नहीं किया हैं इससे प्रदेश के पांच सौ प्रोफेसरों के अर्जित अवकाश की एन्ट्री माड्यूलर में नहीं हो पाने से अर्जित अवकाश नगदीकरण बिलों का करोडो रुपये का भुगतान अटका हुआ हैं। आयुक्त द्वारा जानबूझकर प्रकरण को लम्बा खींचकर भुगतान में देरी की जा रही है। कोई सुनने को तैयार नहीं है। डेढ़ साल पहले बिलों का भुगतान आसानी से होता था लेकिन अब नियम कानून आड़े आ रहा है।
बहनों पर मेहरबानी, शासकीय सेवकों के साथ भेदभाव –
प्रदेश के समस्त सेवानिवृत प्राध्यापकों ने उनके हक का पैसा देने के लिए सीएम हेल्पलाईन के साथ ही अन्य माध्यमों से आयुक्त उच्च शिक्षा को अर्जित अवकाश नगदीकरण के भुगतान को लेकर शिकायत दर्ज की हैं, लेकिन अब तक उन्है भुगतान नहीं हुआ हैं, जबकि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार बीते करीब डेंढ साल से ही लाडली बहना योजना के नाम पर करोड़ों रुपया फ्री में बांट रही हैं, लेकिन वर्षो तक शासन की सेवा करने वाले प्राध्यापकों के साथ उनकी सेवानिवृति के बाद भी सरकार द्वारा भेदभाव किया जा रहा हैं। जबकि सेवानिवृत प्राध्यापक वर्तमान में उम्र के इस पड़ाव में हैं, जहां उन्है उनके सभी स्वत्व का पूर्ण भुगतान होना चाहिए, बावजूद इसके उन्है भटकने को मजबूर होना पड़ रहा हैं।
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