– जावरा के महावीर जैन नेशनल स्कूल में जन्माष्टमी पर गूंजा ‘जय श्रीकृष्ण’, विद्यार्थियों ने मटकी फोड़, रासलीला और कृष्ण जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति से बांधा समां।
जावरा। महावीर जैन नेशनल स्कूल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के पावन अवसर पर तीन दिवसीय भव्य एवं आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान विद्यालय परिसर उत्साह, उमंग और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक गतिविधियों में पूरे उत्साह और जोश के साथ भाग लिया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों, कर्म, धर्म तथा भारतीय संस्कृति से परिचित कराना रहा।
कक्षा स्तर पर हुई मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं –
जन्माष्टमी समारोह के अंतर्गत विद्यालय की प्रत्येक कक्षा में मटकी फोड़ प्रतियोगिता आयोजित की गई। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों से लेकर बड़े विद्यार्थियों तक सभी ने प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके साथ ही इंटर-हाउस मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न हाउस के विद्यार्थियों ने टीम भावना, उत्साह और ऊर्जा का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों के जोश और उत्साह से पूरा विद्यालय परिसर ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।

श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित भव्य नाट्य प्रस्तुति –
समारोह के तीसरे दिन विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण जीवन पर आधारित भव्य नाट्य प्रस्तुति दी। नाटक के माध्यम से श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर कंस वध और धर्म की स्थापना तक की महत्वपूर्ण जीवन-यात्रा को प्रभावशाली ढंग से मंच पर जीवंत किया गया। नाटक की शुरुआत कंस के बढ़ते अत्याचारों से हुई। मथुरा की प्रजा कंस के अत्याचारों से त्रस्त थी। जब अधर्म और अत्याचार चरम पर पहुंचने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण जन्म का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा और पूरे वातावरण में भक्तिमय भाव उत्पन्न हो गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के गोकुल पहुंचने और यशोदा मैया द्वारा उनके पालन-पोषण का सुंदर चित्रण किया। नन्हे कृष्ण की बाल लीलाओं और यशोदा मैया के वात्सल्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। गोकुल में कृष्ण के बाल्यकाल की लीलाओं के माध्यम से प्रेम, स्नेह और आनंद का संदेश दिया गया।
कालिया नाग प्रसंग और राधा-कृष्ण की रासलीला ने मोहा मन –
नाट्य प्रस्तुति में कालिया नाग प्रसंग को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। यमुना नदी के जल को विषैला बनाने वाले कालिया नाग से श्रीकृष्ण के संघर्ष और उसके अहंकार के अंत का मंचन किया गया। विद्यार्थियों ने इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि सत्य और साहस के सामने बुराई एवं अहंकार अधिक समय तक टिक नहीं सकते। इसके पश्चात राधा-कृष्ण की रासलीला का मनमोहक मंचन किया गया। मधुर संगीत और भावपूर्ण नृत्य के साथ प्रस्तुत इस दृश्य ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने दर्शकों को श्रीकृष्ण की भक्ति और प्रेम के भाव से जोड़ दिया।
कंस वध के साथ दिया धर्म की विजय का संदेश –
नाटक का चरम बिंदु कंस वध रहा। श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर कंस के अत्याचारों का अंत किया और प्रजा को उसके भय से मुक्त किया। कंस वध के साथ ही अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और मंच प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।

कृष्ण भजनों से भक्तिमय हुआ विद्यालय परिसर –
नाट्य प्रस्तुति के साथ विद्यार्थियों द्वारा कृष्ण भजनों एवं संगीतमय प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया। मधुर भजनों की प्रस्तुति से विद्यालय परिसर भक्तिमय हो उठा और विद्यार्थी कृष्ण भक्ति में झूमते नजर आए। संगीत और भक्ति के इस संगम ने समारोह को और भी आकर्षक एवं यादगार बना दिया।
प्राचार्य डॉ. अश्विन गंगवाल ने बताया श्रीकृष्ण के जीवन का महत्व –
कार्यक्रम के अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. अश्विन गंगवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से मिलने वाली महत्वपूर्ण शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सत्य के मार्ग पर चलने, कर्तव्य का पालन करने, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने तथा कर्म को सर्वोच्च महत्व देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया।
संस्कृति और संस्कारों से जोडऩे का सार्थक प्रयास –
तीन दिवसीय जन्माष्टमी समारोह विद्यार्थियों के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन से जोडऩे का प्रभावी माध्यम भी बना। विद्यालय परिवार ने इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा, टीम भावना तथा भारतीय संस्कारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का सार्थक प्रयास किया। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने समारोह को भव्य, जीवंत और अविस्मरणीय बना दिया।

