– कश्मीरी गली स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ आयोजन
– माँ सरस्वती, प्रणवाक्षर ऊँ और माँ भारती के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ शुभारंभ
जावरा। शहर के कश्मीरी गली स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में गुरुवार से विद्यारंभ संस्कार समारोह पूर्वक प्रारंभ हुआ। आयोजन में अतिथि के रुप में संतोष विश्वकर्मा (शिशु वाटिका प्रमुख, मालवा प्रांत), विशेष अतिथि सुमित्रा बामनिया (संकुल प्राचार्य कमला नेहरू), अध्यक्ष अजीत चत्तर (अध्यक्ष विवेक भारती शिक्षण समिति) के साथ विवेक भारती शिक्षण समिति के सचिव तन्मय सोनी, समिति के वरिष्ठ सदस्य अनिल पावेचा, बंशीलाल पोरवाल और अभय कांठेड़ उपस्थित रहे। अतिथि परिचय प्रधानाचार्य शीला जैन ने करवाया। अतिथियों का स्वागत हरेन्द्र कुँवर चौहान, महेश पाटीदार, रीना औरा ने किया।
सौलह संस्कारों में एक हैं विद्यारंभ संस्कार –
मुख्य अतिथि संतोष विश्वकर्मा ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यारंभ संस्कार 16 संस्कारों में से एक है और यह भैया-बहनों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। विद्या भारती की योजनानुसार यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों में किया जाता है। प्राचीन काल में गुरुकुल व्यवस्था में जिस प्रकार 16 संस्कारों का निर्वहन किया जाता था। आज समय है, हमें हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता फिर से अपनानी होगी, इसी के द्वारा हम हमारी भावी पीढ़ी को संस्कारवान, सुसंस्कृति और अनुशासित बना सकते हैं। आज बड़े-बड़े विकसित देश विद्या भारती से प्रेरणा लेकर हमारी शिक्षण पद्धति अपना रहे हैं। विशेष अतिथि सुमित्रा बामनिया ने कहा कि विद्यारंभ संस्कार का यह कार्यक्रम प्रशंसनीय है, इसी के द्वारा भैया-बहनों में संस्कारों का सृजन किया जा सकता हैं।
नन्है मुन्नों ने दी नृत्य व गीत की प्रस्तुति –
कार्यक्रम के अध्यक्ष अजीत चत्तर ने कहा कि विद्यारंभ संस्कार का यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष विद्यालय में आयोजित किया जाता है। जिसमें शिक्षा आरंभ करने वाले भैया-बहिन और उनके माता-पिता सम्मिलित होते हैं। कार्यक्रम में विद्यालय के नन्हे मुन्ने भैया-बहनों द्वारा नृत्य एवं गीत की बहुत ही सुंदर और मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गई। इसके बाद गायत्री शक्तिपीठ के गुरुजनों के सानिध्य में शिक्षा आरंभ करने वाले भैया-बहिन और उनके माता-पिता द्वारा वेद पूजन एवं हवन किया गया। स्लेट का पूजन कर, माता-पिता द्वारा अपने बच्चों से प्रणवाक्षर ऊँ लिखवाया गया। संचालन प्रमिला टुकडिय़ा ने किया। आभार तन्मय सोनी ने माना।


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