– असामाजिक तत्वो पर कार्रवाई करने और स्कूल को सुरक्षा प्रदान करने की रखी मांग
जावरा। शहर के सेंट पीटर्स सीनियर सेकेंडरी स्कुल में अखिल भारतीय विद्यार्र्थी परिषद के पदाधिकारियों व कार्यकर्र्ताओं के प्रदर्शन के बाद स्कुल प्रशासन के पालक शिक्षक संघ ने प्रदर्शन का विरोध जताते हुए जिला कलेक्टर राजेश बाथम के नाम एसडीएम त्रिलोचन गौड़ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शनिवार को सेंट पीटर्स सिनीयर सेकेंडरी स्कूल परिसर के अंदर परीक्षा के दौरान एबीवीपी प्रमुख व कार्यकर्ताओं द्वारा अतिचार एवं उत्पात करने की शिकायत दर्ज कराते हुए असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई तथा स्कुल में सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।
कलेक्टर के नाम दिए ज्ञापन में बताया कि एबीवीपी प्रमुख एवं कार्यकर्ताओं द्वारा औचित्यहीन मुद्दों को लेकर स्कुल परिसर में प्रदर्शन एवं नारेबाजी की गई। साथ ही विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों में बाधा डालने का कार्य किया। उनका उद्देश्य केवल विद्यालय कार्यशैली में व्यवधान उत्पन्न करना तथा विद्यालय की छवि को धूमिल करना होता है। यह कि विद्यालय व महाविद्यालय अलग-अलग शैक्षणिक संस्थान है, जिनकी कार्यशैली अपने स्तर पर भिन्न है, उसके बावजूद भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा विद्यालय में एबीवीपी की कार्यकारिणी गठित करने का दबाव बनाया जा रहा है। फादर प्रताप बारिया एवं सिस्टर जेसिंथा मारिया का कहना है कि वर्तमान में स्कुल में विद्यालय कार्यकारिणी, विद्यार्थी परिषद एवं पालक, शिक्षक संघ, विद्यालय संचालन के सभी मापदंडों को पूरा करते है। इस पर एबीवीपी द्वारा कार्यकारिणी गठन का दवाब बनाना सर्वथा अनुचित है। इस प्रकार के अनुशासनहीन एवं असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए प्रदर्शनों से संस्था की छवि धूमिल होती है। उक्त घटना से विद्यार्थियों व पालकों में भय व्याप्त हुआ है, जिसे देखते हुए शासन-प्रशासन तुरंत विद्यालय सुरक्षा प्रदान करे। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा स्कुल प्रशासन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार है, विद्यालय में किसी भी प्रकार की धर्मांतरण गतिविधियां संचालित नही होती और ना ही किसी धर्म विशेष को बढावा दिया जाता है। विद्यालय सभी धर्मो का स मान करते हुए सभी धर्मो के उत्सवों को समान रूप से विद्यालय में स्थान देता है। एसडीएम से अनुरोध किया कि भविष्य में विद्यालय में होने वाले इस प्रकार के अनुचित एवं गैरकानूनी प्रदर्शनों को रोकने के लिए कठोर व वैधानिक कार्यवाही करे, इससे न केवल विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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