– सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन में देशभर के ख्यात साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति
जावरा। देश के जाने-माने व्यंग्य एवं गीतकार कवि राजेन्द्र श्रोत्रिय (जावरा) के नवीन काव्य-संग्रह ‘मां निरूत्तर है’ का भव्य विमोचन समारोह पुणे के होटल फार्म पैराडाइज, मान रोड, हिंजेवाड़ी में साहित्यिक गरिमा और रचनात्मक ऊर्जा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का सफल संयोजन साहित्यिक संस्था ‘एक प्रयास, भारत’ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि महेन्द्र ‘माणिक’ ने किया।
विमोचन समारोह में हास्य कवि शरदेन्दु शुक्ला ‘शरद’, मॉडर्न कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डा. प्रेरणा उबाले, ख्यात गज़़लकारा इंदिरा पूनावाला, फिल्म गीतकार एवं संस्था एक प्रयास भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू चौरसिया (इंदौर) तथा महेन्द्र ‘माणिक’ ने मुख्य अतिथि के रूप में मंच की शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों के करकमलों से काव्य-संग्रह ‘मां निरूत्तर है’ का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर कवि राजेन्द्र श्रोत्रिय को ‘साहित्य गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
हिन्दी गौरव सम्मान से किया सम्मानित –
कार्यक्रम का शुभारंभ संगीतज्ञ डा. ऋतु भट्ट के वाद्य वादन तथा पिनाक दीपक द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात काव्य-पाठ और विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति ने पूरे सभागार को साहित्यिक रस से सराबोर कर दिया। समारोह में पुणे सहित देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इनमें सुरजीत सिंह ‘जख्मी’, सुनील जोशी, एस.एन.डी.टी. कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डा. निर्मला राजपूत, वेदस्मृति ‘कृति’, डा. अनीता जठार, वैज्ञानिक एवं कवि डा. अनिल बागवान, डा. शैलजा दुबे, नंदकुमार मिश्र ‘आदित्य’, गोविंद कुमार मिश्र ‘प्रभाकर’, जम्मू-कश्मीर से पधारे गज़़लकार प्यासा अंजुम, डा. ज्योति कृष्णा, गायक सतीश कुलकर्णी, संस्था एक प्रयास भारत की राष्ट्रीय अध्यक्षा विद्या सराफ, पालिंगो भाषा संस्थान की संस्थापक भावना गुप्ता ‘महेंद्र’ तथा समाजसेवी जब्बार शेख शामिल रहे। इन सभी साहित्यसेवियों को हिंदी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
काव्य पाठ से दी कार्यक्रम को ऊंचाई –
सभी सम्मानित कवि-कवयित्रियों ने अपने सशक्त काव्य-पाठ से कार्यक्रम को ऊँचाई प्रदान की। सफल और प्रभावशाली आयोजन का कुशल संचालन कीर्तिश गरिमा श्रोत्रिय ने किया, जबकि अर्चिता विवेक दीपक ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के समापन पर गज़़लकारा इंदिरा पूनावाला के दिवंगत शौहर एम. एच. पूनावाला तथा पुणे की विख्यात साहित्यकारा स्वर्गीय प्रभा माथुर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह आयोजन न केवल कवि राजेन्द्र श्रोत्रिय की साहित्यिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, बल्कि पुणे के साहित्यिक परिदृश्य में भी एक स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।
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