– दिवाकर भवन पर धर्मसभा में बताई नवकार मंत्र की महिमा
– दिवाकर भवन पर 23 से प्रारंभ होगा पांच दिवसीय आयोजन
जावरा। नमोकार मन्त्र जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण मन्त्र है। इसे नवकार मन्त्र, नमस्कार मन्त्र या पंच परमेष्ठि नमस्कार भी कहा जाता है। इस मन्त्र में अरिहन्तों, सिद्धों, आचार्यों, उपाध्यायों और साधुओं का नमस्कार किया गया है। नमोकार महामंत्र एक लोकोत्तर मंत्र है। इस मंत्र को जैन धर्म का परम पवित्र और अनादि मूल मंत्र माना जाता है। इसमें किसी व्यक्ति का नहीं, किंतु संपूर्ण रूप से विकसित और विकासमान विशुद्ध आत्मस्वरूप का ही दर्शन, स्मरण, चिंतन, ध्यान एवं अनुभव किया जाता है। इसलिए यह अनादि और अक्षयस्वरूपी मंत्र है। लौकिक मंत्र आदि सिर्फ लौकिक लाभ पहुँचाते हैं, किंतु लोकोत्तर मंत्र लौकिक और लोकोत्तर दोनों कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए नमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है।
नवकार मंत्र की यह महिमा दिवाकर भवन पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड गौरव प्रखर वक्ता रविन्द्र मुनि जी म.सा.ने बखान की। मुनिश्री ने कहा कि इस महामंत्र को जैन धर्म में सबसे प्रभावशाली माना जाता है। ये पाँच परमेष्ठी हैं। इन पवित्र आत्माओं को शुद्ध भावपूर्वक किया गया यह पंच नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है। संसार में सबसे उत्तम मंगल है। इस मंत्र के प्रथम पाँच पदों में 35 अक्षर और शेष दो पदों में 33 अक्षर हैं। इस तरह कुल 68 अक्षरों का यह महामंत्र समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला व कल्याणकारी अनादि सिद्ध मंत्र है। इसकी आराधना करने वाला स्वर्ग और मुक्ति को प्राप्त कर लेता है।नमोकार-स्मरण से अनेक लोगों के रोग, दरिद्रता, भय, विपत्तियाँ दूर होने की अनुभव सिद्ध घटनाएँ सुनी जाती हैं। मन चाहे काम आसानी से बन जाने के अनुभव भी सुने हैं।
पांच दिवसीय आयोजन 23 से होगा प्रारंभ –
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्रीसंघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिय़ा कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी प्रसिद्ध वक्ता जगत वल्लभ जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमलजी महाराज साहब की जन्म जयंती एवं जावरा के गौरव उपाध्याय प्रवर कस्तूरचंद जी म.सा.कि दीक्षा जयंती के उपलक्ष में पाँच दिवसीय कार्यक्रम 23 गुरुवार को सामायिक दिवस 24 शुक्रवार कस्तूरचंदजी महाराज साहब के जाप,गुणानुवाद सभा एवं 25 शनिवार दिवाकर जयंती तेरस के जाप,गुणानुवाद गौतम प्रसादी सागर साधना भवन पर रहेगी। 26 रविवार विदाई समारोह उपवास दिवस 27 को लोकाशाह जयंती के रूप में मनाया जायेगा। धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया ।


