मुख्यमंत्री के गृह नगर में ही अधिकारी लापरवाह, छ: माह से सेवा निवृत प्राध्यापक के चिकित्सा देयक लटका रखा
– आयुक्त के आदेश के बाद भी अब तक नहीं हुआ भुगतान
– रतलाम टे्रजरी ने भी बजट मिलने के बाद भी नहीं किया भुगतान
जावरा। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में अधिकारियों की लापरवाही तो जग जाहिर हैं, लेकिन प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव के गृहनगर के ही अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया हैं, जिसमें रतलाम के शासकीय कन्या महाविद्यालय से सेवानिवृत हुए प्राध्यापक डॉ मदनलाल गांगले के चिकित्सा देयकों को बीते छ: माह से क्षैत्रीय संचालक स्वास्थ सेवा उज्जैन के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मांगे गए समस्त दस्तावेज देने के बाद भी लटका रखा हैं। इतना ही नहीं आयुक्त उच्च शिक्षा द्वारा बजट में राशि देने के बाद भी रतलाम ट्रेजरी द्वारा बिल का भुगतान नहीं किया गया हैं। जिससे अब परेशान होकर प्राध्यापक ने सीएम हेल्पलाईन में भी शिकायत दर्ज की हैं, वहीं मामले में मीडिया का सहारा लेना पड़ा हैं।
यह था मामला –
शहर के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ मदनलाल गांगले ने उज्जेन के क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ सेवाओं के अधिकारी एवं कर्मचारियों पर उनके चिकित्सा देयक बीलों के कार्योत्तर स्वीकृति की मांग करते हुए उन पर लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाया हैं। आपने बताया कि पांच माह पूर्व आपत्तियों का निराकरण करके उनके द्वारा सेवाकाल के दौरान ही क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ सेवाएं उज्जैन कार्यालय को स्पीड पोस्ट के माध्यम से दिनांक 6 फरवरी 24 को 23 हजार 90 रुपए के मूल चिकित्सा देयक बिल प्रेषित किए थे, तत्पश्चात दिनांक 20 फरवरी 24 को भी इनके द्वारा क्षैत्रीय संचालक कार्यालय उज्जैन उपस्थित होकर कार्योत्तर स्वीकृति प्रमाण पत्र, रतलाम सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा लंबी अवधि के उपचार का प्रमाण पत्र और मूल चिकित्सा देयक 38 हजार 603 रुपए के बिलों को जमा करवाकर रसीद प्राप्त की थी। लेकिन इतना अरसा बीत जाने के बाद भी चिकित्सा देयक बिलों की कार्योत्तर स्वीकृति आदेश नहीं देना लापरवाही और मनमानी को ही उजागर करता हैं। डॉ गांगले ने शिघ्रातिशीघ्र दोनो चिकित्सा देयक बिलों के कार्योत्तर स्वीकृति की मांग की हैं। ज्ञातव्य हैं कि डॉ गांगले हृदय रोगी है और इनकी मेदांता हास्पीटल में फरवरी 2020 में एंज्योप्लास्टी हो चुकी हैं। एंज्योप्लास्टी के पश्चात प्रत्येक छ: माह के अंतराल से इनका मेडिकल परिक्षण डॉ शैलेन्द्र त्रिवेदी ही करते आ रहे हैं।
बजट में राशि होने के बाद नहीं किया बिल पास –
इधर डॉ गांगले का कहना है कि कार्यालय आयुक्त उच्च शिक्षा मध्यप्रदेश शासन भोपाल द्वारा आदेश क्रमांक 757/109/बजट/भोपाल दिनांक 15/05/23 के तहत शासकीय कन्या स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय रतलाम को 38 हजार 603 रुपए का बजट आंवटित किया गया था, जब कॉलेज प्रशासन द्वारा रतलाम ट्रेजरी में उक्त राशि का बील लगाया गया तो ट्रेजरी अधिकारी द्वारा बिल पर आपत्ती लगाकर अपनी टिप में सक्षम स्वीकृति आदेश संलग्र करें लिखा और भुगतान नहीं किया और उच्च शिक्षा विभाग के आदेश को नहीं माना। जिसकी शिकायत भी की गई हैं।
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