– जावरा : मतदाता सूची से नाम गायब …. जिम्मेदार कौन ?
– बरसो से कर रहे मतदान, बावजूद 2003 की मतदाता सूची से नाम कैसे हो गए गायब
जावरा। भारत देश के करीब 12 राज्यों ओर केन्द्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का काम इन दिनों जारी हैं। लेकिन कई विधानसभाओं के हजारों मतदाता इन दिनों गंभीर परेशानी में हैं। वर्षों से मतदान करते आ रहे नागरिकों को जब नई मतदाता सूची में अपना नाम ढूँढने पर नहीं मिला, तो वे हैरान रह गए। स्थिति यह है कि जिन लोगों की पैदाइश भारत में हुई, जो 1947 से यहाँ रह रहे हैं और हर चुनाव में अपने मताधिकार का उपयोग करते रहे, उन्हीं लोगों के नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं हैं, ढुंढने पर भी नहीं मिल रहे। ऐसे ही कुछ मामले जावरा विधानसभा में देखने को मिल रहे हैं। जिस पर अब मतदाता सवाल खड़े रह रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही उठ रहा हैं —
क्या ये लोग अब तक फर्जी मतदान करते रहे थे ? अगर नहीं, तो आखिर इनके नाम अचानक वोटर लिस्ट से गायब कैसे हो गए ? मतदाताओं का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की लापरवाही और नियमों की अस्पष्टता के कारण असली नागरिकों को ही अपने मताधिकार से वंचित होने का डर सता रहा है। मतदान की नागरिकता साबित करने का असल मापदंड क्या हैं ? यह सवाल आज भी मतदाताओं की समझ के बाहर है। दस्तावेज सही, पहचान सही, वर्षों का मतदान भी सही—फिर भी नाम गायब। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि दशकभर से वोट डालने वाले लोगों के नाम ही लिस्ट से गायब होने लगे, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक है। मतदाता आयोग से जवाब मांग रहे हैंं, हम गलत नहीं, व्यवस्था गलत हैं तो फिर सज़ा हमें क्यों ? जावरा में साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी यह मुद्दा जोर पकडेगा और लोग जल्द समाधान की मांग करेंगे।

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