– इतनी बड़ी मंडी होने के बाद भी बोर्डियाकुंआ के पास गंदगी में खड़ी करना पड़ रही लहसुन से भरी ट्रालियां
– जहां ट्राली खड़ी रहती हैं, वहां ना तो सफाई हैं, ना ही लाईट, पानी के लिए भी भटकते हैं किसान
जावरा। कृषि प्रधान देश में जहां सरकारे किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही, लेकिन स्थिति इसके ठीक विपरित हैं, किसानों की आय दोगुनी तो दूर, चार माह की कड़ी मेहनत के बाद जब किसान अपनी फसल लेकर उसे बेचने मंडी में जाए तो उसे वहां दाम तो ठीक हैं, मुलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं होती हैं। ऐसा ही हाल एशिया की टॉप मंडियों में शामिल जावरा की कृषी उपज मंडी (लहसुन मंडी) में देखने को मिल रहा हैं। शहर के खाचरौद नाका पर स्थित लहुसन मंडी में इतनी जगह होने के बाद भी मंडी में लहसुन लेकर आने वाले किसानों को मंडी के बजाय समीप स्थित बोर्डिया कुंआ के खाली मैदान में खड़ा किया जाता हैं। जहां न तो सफाई होती हैं, ना ही बिजली की व्यवस्था हैं। ऐसे में किसानों को मच्छरों के बीच, बदबु में रात गुजरना पड़ती हैं। किसानों को पेयजल के लिए भी भटकना पड़ता हैं। किसानों को सुविधाए मुहैया करवाने का जिम्मा जिन अधिकारियों के कंधे पर हैं वे भी समय पर मंडी में मौजुद नहीं रहते हैं। ऐसे में परेशानी और अधिक बढ़ जाती हॅैं। अधिकारियों और बाबुओं के नहीं रहने पर मंडी केवल गार्ड के भरोसे ही चल रही हैं।
6 बजते ही हो जाते रतलाम रवाना –
खाचरौद नाका स्थित लहसुन मंडी की व्यवस्थाऐं जिन साहब के हाथ में हैं, ेरतलाम से आना जाना करते हैं, सुबह 10 बजे मंडी पहुंचते है और शाम की 6 बजते ही महाशय रतलाम की और प्रस्थान कर देते हैं। जबकि मंडी सचिव स्वयं भी चौबीस घंटे ड्यूटी निभाते हैं, लेकिन उनके बाबु समय से घर चले जाते हैं। ऐसे में उनके जाने के बाद मंडी गार्डो के भरोसे ही रह जाती हैं। सीमित अधिकारों के साथ गार्ड मंडी की रखवाली करते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने जिन अधिकारियों को मोटी पगार पर मंडी की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पदस्थ किया हैं, वे अपने घर जाकर आराम की नींद सो जाते हैं। मंडी प्रांगण खाली होने के बाद भी ट्राली को मंडी में प्रवेश न देते हुए, उन्है बोर्डियाकुंआ मैदान पर खड़ा करवा दिया जाता हैं। जहां न तो सुरक्षा हैं और ना ही सुविधा, ऐसे में मंडी में ऊपज लेकर आया किसान परेशान ही होता हैं।
टोकम सिस्टम से हो निलामी –
विशाल मंडी प्रांगण खाली होने के बाद भी यदि मंडी अधिकारी इन ट्रालियों को बोर्डियाकुंआ मैदान के बजाय सीधे मंडी में प्रवेश दे और टोकन देकर उनकी निलामी की व्यवस्था करवाए तो किसान भी सुरक्षित रहेगा और सुविधाओं से वंचित भी नहीं होगा। मंडी प्रांगण में ट्राली खड़ी रहने और टोकन सिस्टम से निलामी कार्य होने पर किसान जल्दी फ्री होकर अपने घर वापस जा सकेगा।
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