5- बालिकाओं से मारपीट के आरोप में मिली सजा, लेकिन वो भी पहले ही भुगत ली
– सऩ् 2019 में उजागर हुआ था मामला, तब से न्यायालय में चल रहा था प्रकरण
जावरा। रतलाम जिले के साथ ही पुरे प्रदेश और देशभर में चर्चित हुए शहर के पिपलौदा रोड़ स्थित कुंदन कुटीर बालगृह (बालिका) के आरोपियों केा लेकर मंगलवार को न्यायालय का फैसला आया। जिसमें बालगृह की संचालिका को न्यायालय ने 2 माह की सजा के साथ 6 हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया, वहीं मामले में अन्य 4 आरोपियों को बरी कर दिया गया है, जबकि एक आरोपी की कोरोना से मौत हो चुकी है। न्यायालय ने संचालिका को जो सुनाई है, वह सजा सन् 2019 में काट चुकी है। इसलिए अब उन्है कारावास नहीं भेजा गया है। केवल अर्थदण्ड ही जमा करवाया गया है।
बालिकागृह की संचालिका डॉ रचना भारतीय, संचालिका के पति ओमप्रकाश भारतीय के साथ एनजीओ के अध्यक्ष संदेश जैन तथा सचिव दिलीप बरैया पर नायब तहसीलदार सीएल टांक की रिपोर्ट पर पुलिस ने भादवि की धारा 376(2)(घ), 354, 323, 120 बी, 34 के साथ लैगिंग अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम (पास्को एक्ट)की धारा 5 (डी), 6,7, 8 तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। वहीं मामले में के साथ एनजीओ की अधिक्षीका हंसा पाठक तथा कर्मचारी नेहा सिसौदिया को भी आरोपी बनाया गया था। 2019से लेकर 2023 तक चले इस चर्चित प्रकरण में मंगलवार को फैसला आया। जिसमें न्यायालय ने बालगृह की संचालिका डॉ रचना भारतीय को बालिकाओं के साथ मारपीट करने के मामले में 2 माह की सजा तथा 6 हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। हालाकि 2019 में संचालिका न्यायिक हिरासत में अपनी सजा की अवधि काट चुकी है, इसलिए फैसले में सुनाई सजा के तहत उन्है कारावास नहीं भेजा गया है। केवल अर्थदण्ड की जमा करवाया गया है। इधर मामले में संचालिका के पति ओमप्रकाश भारतीय, अध्यक्ष संदेश जैन, अधीक्षिका हंसा पाठक तथा नेहा सिसौदिया को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया है। वहीं मामले में सचिव दिलीप बरैया की पूर्व में कोरोना से मौत हो चुकी है।


