– सहप्रांत प्रमुख मालवा प्रांत ने फीता काटकर किया लोकापर्ण
जावरा। कश्मीरी गली स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में नवनिर्मित तीन कक्षों का लोकापर्ण समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि सुंदरलाल शर्मा (सह प्रांत प्रमुख, मालवा प्रांत, उज्जैन) विशेष अतिथि शेखर नाहर, विशेष अतिथि भूपेंद्र डांगी एवं अध्यक्ष महेंद्र भगत (विभाग समन्वयक, उज्जैन) के द्वारा नवीन कक्षों का फीता काटकर लोकापर्ण किया।
अतिथियों ने कक्षा प्रथम में अध्ययनरत बहिन के पद चिन्हों के साथ नवीन कक्षा में प्रवेश किया और भगवान श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद नवीन कक्षा में ही नौ कन्याओं का पूजन कर, भोजन करवाया गया। अतिथियों से परिचय विवेक भारती शिक्षण समिति के सचिव तन्मय सोनी ने करवाया। विवेक भारती शिक्षण समिति के अध्यक्ष अजीत चत्तर ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की।
शिशु मंदिर के आधार स्तम्भों का किया सम्मान –
समिति के वरिष्ठ परामर्शदाता जिन्होंने सन् 1983 में सरस्वती शिशु मंदिर का बीजा रोपण किया जो आज एक वटवृक्ष की तरह जावरा में आज हजारों भैया-बहनों को शिक्षा के साथ संस्कारवान और एक आदर्श नागरिक बनाने का कार्य कर रहा है। ऐसे सरस्वती शिशु मंदिर के आधार स्तंभ बाबूलाल नाहर, सुरेश मेहता, अनिल पावेचा एवं कानसिंह चौहान का वर्तमान प्रबंध कार्यकारिणी समिति के द्वारा शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।
संस्कारो के साथ संस्कृति को बढ़ावा देने शुरु की संस्था –
सुरेश मेहता ने बताया कि सन् 1981 में एक विचार आया कि एक ऐसी संस्था जो भैया-बहनों को शिक्षा के साथ संस्कारों और हमारी संस्कृति का भी ज्ञान दे, जावरा में होनी चाहिए। परमात्मा की कृपा से सन् 1983 में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना हुई जो आज एक वट वृक्ष की तरह बढ़ता ही जा रहा है। विभाग समन्वयक महेंद्र भगत ने बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर के भैया-बहिन विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में अनुशासन और एक आदर्श प्रस्तुत करते हुए, कार्य कर रहे हैं।
प्रत्येक जिले में स्थापित हैं शिशु मंदिर –
सह प्रांत प्रमुख सुंदरलाल शर्मा ने बताया कि आज देश के प्रत्येक जिले में सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित है, जो देश को आगे बढ़ाने वाले भैया-बहनों को तैयार कर रहे हैं। आज शिशु मंदिर से निकले हजारों भैया-बहिन सैनिक, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, नेता, सामाजिक कार्यकर्ता बनकर समाज और देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं और आज वर्तमान प्रबंध कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर की नींव रखने वाले वरिष्ठ सदस्यों का जो सम्मान किया गया है, यह सरस्वती शिशु मंदिर के संस्कारों का परिचय देता है और यही सरस्वती शिशु मंदिर की पहचान है। कार्यक्रम में राधेश्याम पोरवाल, शीतल चौरडिय़ा, रमिला पाटीदार, नीलम बरैया, रेणुबाला शर्मा, कुसुम शर्मा दीदी, शिवेंद्र माथुर एवं गणमान्य नागरिको की गरिमामय उपस्थिति रही। संचालन विवेक भारती शिक्षण समिति के सहसचिव लोकेश शर्मा ने किया। आभार प्रधानाचार्य शीला सोन ने माना।
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