– भगतसिंह कॉलेज में हिंदी विभाग द्वारा व्याख्यानमाला का आयोजन
जावरा। मूल्य दो प्रकार के होते हैं। पारंपरिक और आधुनिक। पारंपरिक मूल्य पुरातन और शाश्वत होते हैं। समय के साथ मूल्य में बदलाव उनके आधुनिक रूप को परिलक्षित करता है। आज के इस बदलते दौर में जहां हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढऩे के कारण लगातार जीवन मूल्यों का हृास हो रहा है। वहीं, विश्व शांति की जगह एक देश दूसरे देश पर आक्रमण की तैयारी कर रहा है। एक ही परिवार में भाई, भाई का गला घोंट रहा है। सभी एक दूसरे की आलोचना करने में लगे है। ऐसे माहौल में मानव मूल्यों को या जीवन मूल्यों को स्थापित करने, पारिवारिक संबंधों को स्थापित करने में लोगों को प्रेरणा देने और उनका मार्गदर्शन करने में एक समृद्ध साहित्य की आवश्यकता है जो मानव में सोए हुए जीवन मूल्यों को जगा सके।
यह बात शासकीय स्नातकोत्तर कला और विज्ञान महाविद्यालय रतलाम में पदस्थ डॉ.अर्चना भट्ट ने भगतसिंह शासकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय के महाविद्यालयीन गुणवत्ता उन्नयन प्रकोष्ठ और नैक मूल्यांकन के तहत् हिंदी विभाग ने मानव मूल्य और साहित्य विषय पर विशेष व्याख्यान माला के तहत सम्बोधित करते हुए कहीं। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.आभा सक्सेना ने कहा कि हमारे देश में साहित्य के महत्व को हमेशा स्वीकार किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य में कहानी एक ऐसी विधा है जिसमें समूचे मानव जीवन की अभिव्यक्ति हुई हैं। मानव एक विकासशील प्राणी है और विशाल सृष्टि का अंश है। मानव की स्वाभाविक चिंतन शक्ति और बौद्धिक क्षमता से कुछ ऐसे जीवन के नैतिक मूल्य विकसित हुए हैं जो सारे विश्व में मान्य है । अत: हमें वेद और साहित्य का सेवन नितप्रति करते हुए इनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उतारना चाहिए। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ एजी पठान ने भी सम्बोधित किया। व्याख्यान माला में डॉ.सरिता बैरवा, डॉ.रश्मि पाल सहित विद्यार्थीगण मौजूद थे। आभार प्रो.रमेश वसुनिया ने माना।

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