– कलेक्टर के आदेश की खुलेआम अवहेलना! शीत लहर में बच्चों को 10 बजे से पहले बुलाया
– 10 बजे पहुंचे छात्रों को स्कूल से लौटाया
जावरा। भीषण ठंड और शीत लहर के चलते बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर मिशा सिंह ने मंगलवार को स्पष्ट आदेश जारी किया था कि कोई भी स्कूल सुबह 10 बजे से पहले संचालित नहीं होगा। यह आदेश विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जारी किया गया था। जिसके बाद शहर के सभी स्कूलों ने अपना समय परिवर्तित किया और नर्सरी से लेकर 12 वीं तक के बच्चों को सुबह 10 बजे बुलाया। लेकिन लेकिन शहर के एक निजी स्कूल ने इस प्रशासनिक आदेश को सिरे से खारिज कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने न तो समय बदला और न ही कलेक्टर के निर्देशों का पालन किया।
10 बजे पहुंचे बच्चों को गेट से लौटा दिया –
कलेक्टर के आदेश का पालन करते हुए कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को सुबह 10 बजे स्कूल भेजा, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उन्हें अंदर प्रवेश देने से इंकार कर दिया। बच्चों द्वारा कलेक्टर के आदेश का हवाला दिए जाने पर स्कूल प्रबंधन की ओर से जो जवाब मिला, वह न केवल चौंकाने वाला बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था का अपमान भी है।
स्कूल हम चलाते हैं, कलेक्टर नहीं ! –
सुबह 10 बजे स्कूल पहुंचे बच्चों से स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों से कहा गया कि स्कूल हम चलाते हैं, कलेक्टर नहीं। यह बयान न केवल अहंकार से भरा है बल्कि यह सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना को भी दर्शाता है।
बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़, कानून की अवहेलना –
जहां एक ओर जिला प्रशासन बच्चों को ठंड से बचाने के लिए सतर्क कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी पर उतर आए हैं। यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। जावरा का यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा, यह कानून बनाम मनमानी की सीधी टक्कर बन चुका है।
अब उठ रहे हैं ये सवाल –
– क्या निजी स्कूल प्रशासनिक आदेशों से ऊपर हो गए हैं ?
– क्या बच्चों की सेहत से बड़ा स्कूल प्रबंधन का अहंकार है ?
– क्या जिला प्रशासन इस खुले उल्लंघन पर कार्रवाई करेगा ?

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