– जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा. की 148वीं जन्म जयंती एवं उपाध्याय श्री कस्तुरचंद जी म.सा. की 120वीं दीक्षा जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई
जावरा। भारतीय संस्कृति की धारा में श्रमण परम्परा का सदैव विशिष्ट स्थान रहा है। इसी पावन परम्परा के दो तेजस्वी संत, जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा. तथा मालवरत्न उपाध्याय श्री कस्तुरचंद जी म.सा. की जयंती के उपलक्ष्य में नगर में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा. का जन्म संवत 1934 की कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी को नीमच (म.प्र.) में हुआ था। आपने 18 वर्ष की अल्पायु में संसार की असारता का बोध कर आत्मकल्याण एवं लोकमंगल का पथ अपनाया। वहीं उपाध्याय श्री कस्तुरचंद जी म.सा. का जन्म विक्रम संवत 1948 में जावरा में हुआ तथा दीक्षा संवत 1962 की कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी को रामपुरा में आचार्य श्री खूबचंद जी म.सा. के सान्निध्य में संपन्न हुई।
इस अवसर पर गुरुभक्तों द्वारा स्वामिवात्सल्य जीवदया सोसायटी में गायों का स्वामिवात्सल्य एवं जीवदया कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष बंसतीलाल चपडोद, पारसमल बरडिया, पुखराजमल कोचट्टा, ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष श्रीपाल कोचट्टा सहित सुजानमल कोचट्टा, संदीप रांका, मनोज डांगी, शेखर नाहर, महावीर छाजेड़, पुखराज भंडारी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नवयुवक मंडल अध्यक्ष आकाश जैन, राहुल रांका, पवन डांगी, नितिन कोलन, सुधीर कोचट्टा, अजय चपडोद, संदीप जैन, पराग कोचट्टा, सौरभ दुग्गड आदि युवा कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। जैन दिवाकर महिला मंडल एवं जैन दिवाकर बहु मंडल की सदस्याओं ने भी श्रद्धापूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम को मंगलमय बनाया। पूर्व महामंत्री संदीप रांका एवं नवयुवक मंडल के पूर्व अध्यक्ष मनोज डांगी ने बताया कि संतों की पावन जयंती अवसर पर आयोजित यह सेवा कार्य गुरु कृपा और अहिंसा भावना के प्रचार का प्रतीक है।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

