– कुछ लोगों की निजी जमीनों पर भी किया अवैध खनन
– जीआर इन्फ्रा के अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग
जावरा। भारत माला परियोजना के अन्तर्गत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे (8 लेन) के 1200 किलोमीटर में से कुछ किलोमीटर की टुकडा रतलाम जिले के जावरा के समीप से भी गुजरा, इस टुकड़े को बनाने का काम जीआर इन्फ्रा कंपनी को दिया गया था, लेकिन कंपनी ने बगैर अनुमति के जावरा के आसपास के कई स्थानों पर अवैध रुप से शासकीय और निजी जमीनों पर खनन किया और शासन को करोड़ो का चुना लगाया। जीआर इन्फ्रा कंपनी के अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज करने तथा अवैध खनन पर दण्ड आरोपित करने की मांग को लेकर शुक्रवार को शहर के युवाओं ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम अनुविभागीय अधिकारी त्रिलोचन गौड के रीडर गोपाल प्रजापत को सौंपा।
युवाओं ने ज्ञापन में बताया कि जीआर इन्फ्रा कंपनी व ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से जावरा के कई स्थानों पर अवैध रुप से खनन किया गया। जिससे शासन को करोड़ो रुपये की हानि हुई। वहीं कुछ लोगो की निजी भूमि पर भी धोखाधडी कर दबाव बनाकर दादागिरी करते हुए अधिकारियों की मिलिभगत से करोडों का अवैध खनिज खनन करते हुए चोरी की है। जिले के कुछ स्थान पर टापुनुमा किलों से अवैध रूप मुहनम से खुदाई की गई और उक्त रोड बनाने में उक्त मुरम का उपयोग किया। जिसकी शासन से किसी ने विधिवत अनुमति नहीं ली गई और कंपनी और ठेकेदार ने निजी लाभ कमाने का प्रयास किया।
मशीने लगाकर किया खनन –
ज्ञापन में बताया कि कंपनी व ठेकेदारों ने कई स्थानों पर मुरम के साथ मशीन लगाकर गिट्टीे-पत्थर का भी खनन किया, जिससे शासन और लोगोको आर्थिक रुप से हानि हुई। उक्त खनन को लेकर पुर्व में भी कई बार नागरिकों द्वारा शिकायते संबंधित अधिकारियों और शासन से की गई। जो समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ। सीएम हेल्पलाईन तक भी शिकायते की गई, लेकिन अब तक अवैध खनन को लेकर कोई निराकरण नहीं हुआ।
अधिकारियों की मिली भगत शामिल –
कंपनी द्वारा जिले भर में किए गए अवैध खनन की सूचना जिले के साथ स्थानीय प्रशासन व खनीज अधिकारियों को थी, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस और ना तो ध्यान दिया और ना ही कंपनी व ठेकेदार की मनमानी पर अंकुश लगाया। जिससे राजस्व एवं खनीज अधिकारियों की मिलीभगत साफ जाहीर होती हैं। मिली भगत कर उनके द्वारा कुछ स्थानों पर खसरे आदि में भी हेरफेर किया गया है, जिसकी समुचित जांच शासन के अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए तथा संबंधित दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कडी कार्रवाई की जाना चाहिए।
साजिश रचकर लगाया करोड़ों का चुना –
ज्ञापन में बताया कि एक्सप्रेस वे बनाने वाली कंपनी, उनके ठेकेदार, खनिज ओर राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा सोची समझी साजिश के तहत धोखाधडी क र शासन को लाखों रुपये की हानि पहुंचाते हुए स्थानीय लोगों को भी लाखों-करोडों रुपये की हानि पहुंचाई है। ज्ञापन में इन सभी आरोपो की जांच कर कंपनी व ठेकेदार के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की हैं। अधिकारियों की मिली भगत के चलते पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाया गया हैं। कंपनी और उनके ठेकेदार द्वारा नियमों की अनदेखी की गई है। मामले में जांच कमेटी बनाकर उक्त अधिकारियों, कंपनी और ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधडी, चोरी तथा राशि की वसुली की कार्यवाही की जाए। अन्यथा कार्रवाई नहीं होने पर नागरिकों द्वारा चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
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