– कमानी गेट स्थित देव श्री नमकीन एवं मिठाई की दुकान पर खाद्य विभाग की कार्रवाई, मावा मिठाई और लौंग सेव के नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे
जावरा। शहर के कमानी गेट स्थित एक मिठाई की दुकान से खरीदी गई मिठाई खाने के बाद तीन साल के मासूम बच्चे की मौत और उसके माता-पिता की तबीयत बिगडऩे के मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। शनिवार दोपहर घटना की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित दुकान के बाहर आक्रोशित लोगों की भीड़ जमा हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच एवं कार्रवाई शुरू की। इस घटना ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों की सेहत से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिठाई खाने के बाद परिवार की तबीयत बिगड़ी, मासूम की मौत –
जानकारी के अनुसार, ग्राम बिनोली निवासी एक परिवार ने जावरा के कमानी गेट स्थित देव श्री नमकीन एवं मिठाई की दुकान से मिठाई खरीदी थी। आरोप है कि मिठाई खाने के बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई। इस घटना में तीन साल के मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि उसके माता-पिता बीमार होने के बाद मंदसौर के अस्पताल में उपचाररत हैं। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। वहीं, मासूम की मौत की खबर से लोगों में आक्रोश है। हालांकि, मिठाई और मौत के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि खाद्य पदार्थों की जांच तथा चिकित्सकीय जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत मिलते ही हरकत में आया खाद्य विभाग –
खाद्य सुरक्षा प्रशासन को शिकायत प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ज्योति बघेल ने पुलिस एवं जिला प्रशासन के साथ पुरानी धान मंडी स्थित देव श्री नमकीन भंडार का निरीक्षण किया। मौके पर फर्म के संचालक सत्यनारायण पिता चांदमल अग्रवाल उपस्थित पाए गए। निरीक्षण के दौरान दुकान पर बिक्री के लिए मिठाई और लौंग सेव संग्रहित एवं प्रदर्शित मिली। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण के बाद लगभग पांच किलोग्राम मिठाई निर्माण स्थल पर संग्रहित पाई गई। मावा और शक्कर से तैयार इस मिठाई का नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत लिया गया। इसके साथ ही लौंग सेव का नमूना भी जांच के लिए लिया गया।
भोपाल भेजे गए नमूने, रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई –
खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा है। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। मौके पर अधिकारियों ने दुकान संचालक से साफ-सफाई, खाद्य पंजीयन को प्रदर्शित करने, कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट और पेस्ट कंट्रोल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
मासूम की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल –
तीन साल के बच्चे की मौत और उसके माता-पिता के अस्पताल में भर्ती होने की घटना बेहद गंभीर है। ऐसे में केवल नमूने लेकर रिपोर्ट का इंतजार करना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता; जांच की गति, खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल भी महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर परिवार की तबीयत बिगडऩे की वजह क्या थी ? क्या खरीदी गई मिठाई दूषित थी, क्या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ था, या इसके पीछे कोई अन्य कारण था ? इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय निष्कर्षों से ही स्पष्ट होंगे।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें –
फिलहाल खाद्य विभाग ने मिठाई और लौंग सेव के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। पूरे मामले में प्रयोगशाला की रिपोर्ट, चिकित्सा संबंधी निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई अहम होगी। एक मासूम की मौत से जुड़ा यह मामला केवल एक दुकान तक सीमित नहीं, बल्कि शहर में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि जांच कितनी तेजी और पारदर्शिता से पूरी होती है और यदि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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