– शुगर पेशेंट होने के बाद भी आरडी हास्पीटल में चढ़ा दी बॉटल, दे दिया इंजेक्शन
– सीआरपी 30 गुना बढ़ा होने के बाद भी आरडी हास्पीटल ने कर दिया डिस्चार्ज
– डॉ बोले हमने भर्ती करने के लिए बोला था, परिजनों ने नहीं मानी बात
– सिविल में संडे को नहीं हो सकी ईसीजी, बीपी मशीन भी निकाली खराब
जावरा। शहर के सिविल हास्पीटल और आरडी हास्पीटल की लापरवाही के चलते शहर के बोहरा समाज के प्रतिष्ठित बिज व्यापारी की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने शहर के सिविल हॉस्पिटल और आरडी हास्पीटल के डॉक्टर्स पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुवे मामले में विधायक डॉ राजेन्द्र पाण्डेय से लेकर उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज करते हुए कार्रवाई की मांग की हैं। वहीं आरडी हास्पीटल के डॉक्टर्स ने आरोप को सीरे से खारीज करते हुए कहा कि उन्होने परिजनों को मरीज को भर्ती करने के लिए कहा था, लेकिन वे उन्है अपने घर ले गए घर जाने के बाद क्या हुआ उन्है नहीं मालूम।
शहर के कमानी गेट स्थित हुसैनी बिज भंडार के संचालक अब्बास भाई बोहरा के छोटे भाई मुल्लाहुसैन पिता असगर अली रविवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे ईराक से मोहर्रम में शामिल होकर अपने बोहरा बाखल स्थित निवास पहुंचे थे। दोपहर करीब 2 बजे सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन उन्है सिविल हास्पीटल लेकर गए। अस्पताल लेकर पहुंचे उनके पूत्र मुर्तजा ने कहा कि उन्है घबराहट हो रही हैं तो पहले ईसीजी की जांच कर ले, लेकिन रजिस्टे्रशन काउंटर पर मौजुद कर्मचारी ने कहा कि संडे हैं, आज ईसीजी की जांच नहीं हो सकेगी, इस बात पर उनकी बहस भी हो गई। उस दौरान ड्यूटी पर मोजुद डॉ रोनक कोचट्टा ने उनका परिक्षण किया और बीपी तथा शुगर की जांच लिख दी। लेकिन जब वे उन्है अंदर जांच के लिए ले गए तो बीपी की मशीन खराब निकली, उसे ठोक कर चलाने की कोशिश भी की गई लेकिन वह नहीं चली अंतत: ड्यूटी पर मौजुद नर्स ने वार्डबॉय से उन्है मशीन को चार्ज पर लगाकर वहीं पर रिडिंग लेने की बात कहीं, जैसे तैसे बीपी और शुंगर की जांच हुई। डॉ ने रिपोर्ट देखकर कहा कि कफ बढ़ गया हैं, डॉ कोचट्टा ने टेबलेट लिख दी और निमोलाईजर लेने के कहा और घर भेज दिया।
नहीं मिला आराम तो रात में पहुंचे आरडी हास्पीटल –
मुर्तूजा ने बताया कि दोपहर में पिताजी को घर छोडक़र वे दुकान चले गए, शाम को वापस आकर उन्होने तबीयत पुछी तो बताया के आराम नहीं हैं, थोड़ी देर बार निमोलाईजर लगवाया, लेकिन बात नहीं बनी। ऐसे में रात करीब 8 में उन्है उज्जैन बायपास स्थित आरडी हास्पीटल लेकर गए। जहां मौजुद डाक्टर ने उन्है भर्ती कर, ईसीजी, एक्स रे व ब्लड के साथ अन्य जांच लिखी। रिपोर्ट में फेफडों में इन्फेक्शन, कोरोना काउण्ट भी बढ़ा हुआ मिला, वहीं सीआरपी भी करीब 30 गुना बढ़ा हुआ मिला। जांच के बाद उन्है आईवी सेट लगाकर बॉटल और इंजेक्शन लगाने के लिए कहा, जिस पर परिजनों ने डॉक्टर और स्टॉफ को मुल्लाहुसैन के शुगर पेशेंट होने की बात कहीं, लेकिन इसके बाद भी आरडी हास्पीटल स्टॉफ और डाक्टर ने उन्है यह कहकर समझा दिया कि थोड़ी बहुत शुगर बढ़ेगी बाकी ज्यादा कुछ नहीं होगा, सुबह तक सब ठीक हो जाएगा। इतना कहकर डॉक्टर ने उन्है करीब 3 दिन की बॉटल लिखी जिसे 10-10 घंटे में लगाने के लिए कहा और एक बॉटल रात में लगा दी और बॉटल उतरने के बाद उन्है डिस्चार्ज कर घर भेज दिया तथा सुबह आकर बॉटल लगवाने के लिए कह दिया।
घबराहट हुई तो रात करीब 3 बजे ले गए नर्सिंग होम –
दिवंगत मुल्ला हुसैन के पूत्र मुर्तूजा ने बताया कि आरडी हास्पीटल से बॉटल लगवाने के बाद जब घर पहुंचे तो उन्है अचानक से घबराहट होने लगी। जिस पर उन्है रात करीब 3 बजे पिपलौदा रोड़ स्थित राठौर नर्सिंग होम उपचार हेतु ले गए। परिजनों ने आरडी हास्पीटल पर करवाई गई जांच बताई, तो डॉक्टर हैरान रह गए, बोले सीआरपी का काउंट 30 गुना बढ़ा होने के बाद डिस्चार्ज कैसे कर दिया गया, वहीं जो बॉटल लगाई गई, उससे उनका शुगर लेवल भी हाई हो गया हैं। जब नर्सिंग होम में शुगर की जांच की तो उसका काउंट करीब 600 निकला, ऐसे में नर्सिंग पहुंचने से पहले ही उनकी हालत काफी खराब हो चुकी थी। नर्सिंग होम के डॉक्टर्स ने उनकी शुगर रिकवर करने की कोशिश की लेकिन सुबह करीब 5 बजकर 50 मिनीट पर उपचार के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
पीएम होता तो मौत की वजह स्पष्ट हो जाती –
रविवार की रात में पेशेंट उपचार के लिए आए थे, उनकी जांच की गई, उनका सीआरपी बढ़ा हुआ था, फैफडों में निमोनियां का इन्फेक्शन था। ऐसे में उन्है एंटिबॉयोटिक दी थी, जो बॉटल और इंजेक्शन लगया था, उससे एक दिन में कभी शुगर नहीं बढ़ती हैं, सीआरपी बढ़ा होने के बाद उन्है भर्ती करने के लिए कहा था, लेकिन परिजनों ने कहा कि वे सुबह आकर वापस बॉटल लगावा लेंगे। उन्है ऐसी कोई दवाई, बॉटल या इंजेक्शन नहीं दिया गया, जिससे मरीज का शुगर लेवल हाई हो और पेशेंट की मौत हो जाए। पेशेंट के पर्चे में जो भी दवाई लिखी हैं उसे किसी भी डाक्टर को दिखा कर चेक करवा लेवें। जो ट्रिटमेंट लिखा था, उससे मौत नहीं हो सकती हैं। यदि परिजन मोत के बाद पीएम करवाते तो मौत की वजह स्पष्ट हो जाती। – डॉ रवि आंजना, जनरल फिजिशियन, आरडी हास्पीटल, जावरा
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