– पाटीदार पर गिरफ्तारी का खतरा टलते ही परिवार बोला—फर्जी हुंडियों की असली कहानी सामने आनी चाहिए
– 35 निवेशकों की शिकायत पर पुलिस ने अप्रैल में बीयूडीएस अधिनियम और धोखाधड़ी का दर्ज किया था प्रकरण
जावरा। शहर के बहुचर्चित रहे हुंडियों पर पैसा लेकर नहीं लोटाने वाले धोखाधड़ी प्रकरण में बड़ी राहत देते हुए हाई कोर्ट ने भाजपा नेता भेरूलाल पाटीदार की अंतरिम जमानत के बाद अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। लंबे समय से गिरफ्तारी के खतरे का सामना कर रहे पाटीदार के लिए गुरुवार महत्वपूर्ण रहा जब अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार कर उन्हें संरक्षण प्रदान किया। वहीं इसी मामले में हुंडी दलाल महेंद्र चंडालिया को पूर्व में सिटी थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। दलाल चंडालिया कुछ दिनों पहले जमानत पर रिहा हो चुका है।
35 निवेशकों ने लगाया था 2 करोड़ से अधिक राशि हड़पने का आरोप –
भाजपा नेता का यह प्रकरण तब चर्चा में आया जब अप्रैल माह में करीब 35 निवेशकों ने शहर पुलिस थाने पर एसपी अमित कुमार से चर्चा उन्है मामले से अवगत करवाया था। निवेशकों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने निवेश के नाम पर 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेरूलाल पाटीदार को सौंपी थी। समय पर राशि नहीं लौटने पर निवेशकों ने 10 अप्रैल को पाटीदार के घर के बाहर प्रदर्शन किया था और थाने में लिखित शिकायतें भी दी थीं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने 11 अप्रैल को भाजपा नेता और हुंडी दलाल के विरूद्ध बीएनएस की धारा 406 तथा बीयूडीएस अधिनियम या अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
दलाल ने भरोसे का दुरुपयोग कर फर्जी हुंडियां थमाई –
अग्रिम जमानत मिलने के बाद पाटीदार के पारिवारिक सुर्त्रो ने कहा कि उन्होंने निवेशकों की राशि दलाल महेंद्र चंडालिया को लौटा दी थी। परंतु भरोसा होने के कारण उससे हुंडी नहीं ली गई। परिजनों का दावा है कि इसी भरोसे का गलत फायदा उठाते हुए चंडालिया ने फर्जी हस्ताक्षर कर नकली हुंडियां निवेशकों को दे दीं। परिजनों का कहना है कि इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस को दी थी, लेकिन पुलिस ने इस गंभीर पहलू की जांच करने के बजाय उन्हें न्यायालय में आवेदन लगाने की सलाह दी। उनका कहना है कि यदि पुलिस ईमानदारी से सभी हुंडियों की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर की जांच कराए, तो वे पूरी तरह फर्जी साबित होंगी, क्योंकि किसी भी हुंडी पर पाटीदार के हस्ताक्षर नहीं हैं।
सिविल विवाद को क्रिमिनल बनाने पर उठे सवाल –
सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया कि मामला मूल रूप से सिविल प्रकृति का था, इसके बावजूद पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच के सीधे धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर लिया। यही कारण है कि पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
निवेशकों को अभी भी राशि लौटने की प्रतीक्षा –
अदालत से राहत मिलने के बावजूद निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं। कई निवेशक अब भी अपनी मेहनत की कमाई लौटने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर परिजन कहते हैं कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं, और जल्द ही पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आएगी। इधर निवेशक अब भी अपनी राशि मिलने के इंतजार में हैं।
अंतरिम से अब स्थायी राहत –
अप्रैल माह में प्रकरण दर्ज होन के बाद भी भाजपा नेता पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई थी। नवंबर माह में भेरूलाल पाटीदार को भांजी की शादी के कारण 15 दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी। जिसके बाद उन्होने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। जिस पर हाई कोर्ट ने अब अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत भी मंजूर कर दी है, जिससे गिरफ्तारी का संकट टल गया है।
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