– जनहित की 21 मांगों को लेकर जीवनसिंह शेरपुर पांचवें दिन भी अडिग, घटा 5 किलो वजन
– 21 दिसंबर को हरदा बनेगा जनआंदोलन का इतिहास, बनेगा आंदोलन का पर्याय
– हरदा प्रशासन ने आंदोलन के लिए दी मौखिक अनुमति, लिखीत अनुमति आना बाकी
– भोपाल की तरह यदि सरकार ने धोखा दिया, तो हरदा आंदोलन रहेगा लगातार जारी
जावरा। देश की आज़ादी के महान क्रांतिकारी शहीद भगतसिंह ने अंग्रेजी हुकूमत से अपनी मांगें मनवाने के लिए आमरण अनशन का मार्ग चुना था। उनके अदम्य साहस और संकल्प के आगे तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और उनकी मांगें माननी पड़ीं। उसी ऐतिहासिक परंपरा का अनुसरण करते हुए वर्तमान समय में करणी सेना परिवार प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर आम जनता और सर्व समाज से जुड़ी जनहित की 21 सूत्री मांगों को लेकर बीते पांच दिनों से आमरण अनशन पर डटे हुए हैं।
बताया गया कि हाल ही में इंदौर में पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति दिए जाने के बावजूद जीवनसिंह एवं करणी सेना परिवार के कार्यकर्ताओं के साथ किए गए व्यवहार से आहत होकर उन्होंने यह कठोर कदम उठाया। उनका कहना है कि यह अनशन किसी व्यक्ति या सत्ता के विरोध में नहीं, बल्कि जनहित, न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए है। जीवनसिंह ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रित और अनुशासित है तथा इसका उद्देश्य शासन-प्रशासन से टकराव नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ी 21 सूत्री मांगों को पूरा कराना है।
यह बात करणी सेना परिवार प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर ने गुरुवार को जावरा स्थित अपने कार्यालय पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहीं। शेरपुर ने कहा कि आगामी 21 दिसंबर को मध्यप्रदेश के हरदा में करणी सेना के साथ सर्व समाज के हजारों लोग एकत्रित होकर इस आंदोलन को ऐतिहासिक स्वरूप देंगे। संगठन का दावा है कि यह आंदोलन जनसंकल्प का प्रतीक बनेगा और जनआवाज़ को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि जब तक जनहित की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। हरदा की धरती से उठने वाली यह आवाज शासन तक पहुंचेगी और न्याय की राह प्रशस्त करेगी।
प्रशासन ने दी मौखिक अनुमति –
आंदोलन को लेकर शासन व प्रशासन द्वारा अनुमति मिलने के सवाल पर शेरपुर ने कहा कि हरदा प्रशासन ने उनकी टीम लगातार सम्पर्क में हैं, उन्होने प्रशासन से मंडी या स्टेडियम की मांग की थी। जिस पर प्रशासन ने उन्है नेहरु स्टेडियम में आंदोलन के लिए मौखिक अनुमति प्रदान कर दी हैं। जिसके अनुरूप टीम व्यवस्थाएं जुटाने में लग चुकी हैं। आंदोलन के लिए लिखित अनुमति आना अभी शेष हैं। शेरपुर ने कहा कि करणी सेना के सभी सदस्य शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज करवाते हैं। जिस शहर में भी उनका आंदोलन होता हैं, उस शहर से या शहर वासियों से उनकी कोई दुश्मनी हैं, ऐसे में करणी सेना का कोई भी सदस्य तोडफ़ोड़ या उपद्रव नहीं करता हैं। पुलिस और प्रशासन स्वयं उन पर लाठिया बरसाती हैं।
पांच दिन में घटा 5 किलो वजन –
जीवन सिंह के आमरण अनशन को पांच दिन हो गए हैं, जीवन द्वारा आमरण अनशन किए जाने की सूचना प्रशासन को दिए जाने के बाद भी अब तक प्रशासन की और से कोई भी डाक्टर उनका हेलथ चेकअप करने पहुंचा हैं। संगठन द्वारा नियुक्त किए गए डॉ राजेन्द्र शर्मा ही प्रतिदिन उनका चेकअप कर रहे हैं। आमरन अनशन के दौरान शेरपुर का वजह घट गया हैं। पांच दिन पहले जहां उनका वजन 98 किलोग्राम था, वहीं अब उनका वजन करीब 93 किलो के समीप पहुंच गया हैं। शेरपुर का स्वास्थ लगातार गिरता जा रहा हैं, लेकिन इसके बाद भी अब तक शासन प्रशासन अब तक उनका चेकअप करने नहीं पहुंचा हैं।
राजनैतिक दल बनाना कोई अपराध नहीं –
आंदोलन को राजनीति से प्रेरित होने के सवाल पर जीवन सिंह ने कहा कि करणी सेना कोई राजनीतिक दल नहीं बना रही है और न ही ऐसी कोई मंशा है, हालांकि यदि भविष्य में राजनीतिक दल बनाया जाता है तो वह कोई अपराध नहीं होगा। उन्होंने संगठन की अनुशासनप्रियता पर जोर देते हुए कहा कि करणी सेना के सभी कार्यकर्ता पूर्ण अनुशासन में रहते हुए आंदोलन करते हैं, चाहे वह जावरा की रैली हो या प्रदेश के किसी जिले में की गई रैली हो, इंदौर में भी पुलिस प्रशासन ने आव्हान रैली में व्यवधान डाला था। अंत में उन्होंने प्रशासन से अपील की कि सर्व समाज को न्याय दिलाने के इस आंदोलन को गंभीरता से लिया जाए और जनभावनाओं का सम्मान किया जाए, ताकि स्थिति को टकराव की ओर जाने से रोका जा सके।
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