जावरा। हमे अनंत पुण्योदय के उपार्जन से मनुष्य जन्म मिला हैं और मनुष्य जन्म हमें अपनी सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए मिला हैं चार गतियों में मनुष्य गति को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया हैं। हम सौभाग्य शाली हैं कि मनुष्य जन्म के बाद हमे जैन कुल मिला हैं। हम आर्य देश में पैदा हुए जहां देव गुरु और धर्म हैं। जहां हमे जिनवाणी सुनने का अवसर मिलता हैं। सच्चे मन से सुना जिनवाणी का एक शब्द भी हमारे जीवन को बदल सकता हैं। परमात्मा की पूजन से ज्यादा महत्व जिनवाणी का श्रवण करने में हैं गुरु की जिनवाणी को सुन कर आत्मसात करना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा हैं। जिनवाणी तो अनेकों लोग सुनते हैं। लेकिन अगर उनमें से एक व्यक्ति भी उस राह पर चले तो गुरु के लिए वही सच्चा भक्त होता हैं।
यह बात साध्वी भगवंत डॉ अमृतरसा श्रीजी ने पीपली बाजार उपाश्रय में धर्मसभा को संबोधित करते हुई कही उन्होंने कहा कि जब तक हम स्वस्थ हैं। हमे तप जप कर लेना चाहिए कब यमराज का बुलावा आ जाए पता नहीं कर्मों का क्षय करने के लिए मनुष्य जन्म मिला हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि परमात्मा ने हमारी पांचों इंद्रियों (नाक,कान,आंख,मुंह और जीभ) को पूर्ण रूप से हमको दिया हैं। जिससे हम सब कुछ अच्छे से कर सकते हैं दुनिया में लगभग 200 करोड़ लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलता, 25 करोड़ लोगों को एक समय खाने को भोजन नहीं मिलता, 4 करोड़ लोग देख नहीं सकते लेकिन हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें ये सब नहीं भुगतना पड़ रहा हैं कल से साम्रादित्य महाकथा शास्त्र का पाठन होगा। इस शास्त्र की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि आप जब इस शास्त्र को सुनेंगे तो आपके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा मोह माया सब छूट जाएंगे। मीडिया प्रभारी अरविंद जैंन एवं अतुल सुराणा ने बताया कि कल शासन स्पर्शना पर विशेष प्रवचन पंचायती नोहरे पर होंगे। श्रीसंघ अध्यक्ष अजीत चत्तर एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र कोलन ने श्री संघ के सभी महानुभावों से अधिक से अधिक की संख्या में पधारकर जिनवाणी श्रवण करने का आग्रह किया हे सिद्धितप की तपस्या 16 जुलाई से प्रारंभ होगी साध्वी जी भगवंत ने श्रीसंघ के प्रत्येक घर से एक सिद्धि तप हो एसी भावना व्यक्त की हैं।



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