– कईयों ने तो स्कूल की चाबीयां तक सौंप दी, ताकि वे ही आकर स्कूल खोले
– अध्यापक कार्य के साथ ही स्कूल की बाबुगिरी तक करना पड़ रही अतिथियों को
– खुद के विषय के साथ ही स्थायी शिक्षकों के विषय भी पढा रहे अतिथि
– प्रधानाध्यापक या स्थायी शिक्षक को किसी काम के लिए मना करें तो अगले साल नियुक्त पर मंडराने लगता हैं खतरा
– आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
जावरा। भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता तूल्य माना गया हैं, जब घर पर कोई अतिथि आता हैं तो उसका देवता की तरह आदर सत्कार किया जाता हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के स्कूलों में कम पगार पर अध्यापन के लिए पहुंचने वाले अतिथि शिक्षकों के साथ शासकीय विद्यालय के स्थायी शिक्षकों और प्रधानाचार्यो द्वारा गुलामो जैसा व्यवहार किया जाता हैं। उनसे विद्यालयों में मूल अध्यापन कार्य के साथ साथ विद्यालय में बाबू गिरी तक करवाई जाती हैं। लेकिन महज अपनी नौकरी में अतिथियों को परेशानी ना उठाना पड़े इसके लिए सभी अतिथि बगेर किसी शिकायत के चुप चाप गुलामी सहते है और क्षमता से अधिक काम करते हैं। खुद के विषयों का अध्यापन कार्य तो करवाते ही हैं, साथ ही स्थायी शिक्षकों के विषय भी पढ़ाने को मजबूर होते हैं। अतिथि शिक्षकों की इन समस्याओं पर ना तो शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी ध्यान दे रहा हैं और ना ही सरकार इस और ध्यान दे रही हैं।
कुछ ने चाबियां तक सौंप दी –
अतिथि शिक्षकों से काम किस हद तक लिया जाए, इसके के लिए शासकीय स्कूलों के कई प्रधानाध्यापकों ने अपने स्कूल की चाबिंया तक अतिथि शिक्षकों को सौंप दी हैं, ताकि वे बेचारे समय से पहले स्कूल पहुंचकर स्कूल खोले और स्थायी शिक्षक और हेड मास्टर आराम से स्कूल पहुंचे ओर यदि किसी कारणवश कोई अतिथि थोड़ा लेट हो जाए तो आफत आ जाती हैं, नौकरी पर आने के बाद भी कई बार उनकी सीएल लगा दी जाती हैं और हॉफ डे करना पड़ता हैं।
अनैतिक मांग भी करना पड़ती हैं पूरी –
प्रदेश में नया शिक्षण सत्र प्रारंभ हो गया हैं, ऐसे में प्रदेश के सभी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरु हो गई हैं। विगत कई वर्षो से कार्यरत पुराने व अनुभवी अतिथि शिक्षकों को नियुक्ती के लिए कई मुश्किलों की सामना करना पड़ा रहा हैं। कई प्राचार्य व प्रधानाध्यापक महिला अतिथि शिक्षकों को नियुक्त देने के बदले कई बार अनैतिक मांग भी कर लेते हैं, जिससे महिला अतिथि शिक्षक को या तो स्कूल छोडऩा पड़ता हैं या नौकरी ही छोडऩा पड़ती हैं। बीते वर्ष में यदि किसी अतिथि शिक्षक ने प्राचार्य या प्रधानाध्यापक के बताए अन्य काम को करने में कोई आना कानी की गई तो नए वर्ष में उन्है नियुक्त देने में ये प्राचार्य व प्रधानाध्यापक आनाकानी कर रहे हैं, जबकि राज्य शिक्षा केन्द्र ने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि जो अतिथि पूर्व में विद्यालय में कार्यरत हैं, उन्है ही पहली प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ती दी जाए, लेकिन अपनी हठधर्मिता और बदले की भावना से कई अतिथि शिक्षक अब भी अपनी नियुक्ती के लिए भटक रहे हैं।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन –
अतिथि शिक्षकों ने अपनी समस्याओं की निराकरण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पर नायब तहसीलदार वैभव जैन को संघ के जिलाध्यक्ष कृष्ण कन्हैया सैनी के नेतृत्व में सौंपा। अतिथियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि स्थानांतरण/उच्चपद/प्रभार/ अतिशेष/पद संरचना में अंतर/दर्ज संख्या में कमी इत्यादि कारणों से बाहर हुये, विगत सत्र में कार्यरत, पुराने अनुभवी अतिथि शिक्षकों की रिक्त पदों पर नियुक्ति में प्रथम वरीयता उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेशानुसार दी जाये, ततपश्चात रिक्त पद होने पर नबीन अभ्यर्थियों की स्कूल चयन प्रक्रिया पूर्ण कराई जाये। वर्तमान में जारी आदेश के बिंदु क्रमांक 4.3 के अनुसार विगत सत्र किसी संस्था में एक ही विषय वर्ग के दो पदो में से वर्तमान में एक पद समाप्त होने पर अधिक स्कोर वाले अतिथि शिक्षक को नियुक्ति देने के निर्देश हंै। ऐसे में पुराने अनुभवी अतिधि शिक्षको के साथ यह घोर अन्याय नही करते हुये, न्याय करें और अनुभव तथा वरियता के आधार पर पुराने अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाये। अपनी समस्याओं को लेकर पुराने अतिथि शिक्षक मानसिक रूप से त्रस्त और परेशान हैं। इसलिए तत्काल पुराने अनुभवी अतिथि शिक्षकों के नियुक्ति आदेश में संशोधन कर पुराने अनुभवी को वरीयता देने हेतु उचित आदेश व निर्देश जारी करें, ताकि पुराने अनुभवी अतिथि शिक्षकों की रिक्त पदों पर नियुक्ति हो सके। और परिवारों का भरण पोषण सुचारु रूप से चल सके। इस दौरान बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक मौजुद रहे।



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