– भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़ा है अन्नकुट महोत्सव का महत्व
– मंछापूर्ण मंदिर पर बालाजी को लगाया 56 भोग
– बालाजी मित्र मंडल ने स्टेशन चौराहा स्थित संकट मोचन हनुमान पर किया अन्नकुट का आयोजन
– मंगलवार को भीमाखेड़ी स्थित बालाजी मंदिर पर अन्नकुट महाप्रसादी का आयोजन
जावरा। रोशनी के पर्व दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा के साथ ही अन्नकुट प्रसादी की शुरूआत होती है जो कार्तिक पूर्णिमा तक अनवरत जारी रहती है, क्षैत्र के सभी मंदिरों पर अलग अलग दिन अन्नकुट का आयोजन कर भगवान को 56 भोग लगाया जाता है, भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसादी के रुप में उनके भक्तों को यह अन्नकुट की प्रसादी दी जाती है। जिसमें हजारों की संख्या में मंदिरों में भीड़ जुटती है और अन्नकुट प्रसादी ग्रहण करती है।
शहर के कश्मिरी गली स्थित दिवानजी के मंदिर पुजारी नितेष पोराणिक ने बताया कि दिपावली के दुसरे दिन भगवान गिरीराजधरण की पूजा के साथ 56 भोग के साथ विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। चर्तुमास के अन्तर्गत जिन चीजों को त्याग किया जाता है, उन सभी चीजों का पुन: ग्रहण अन्नकुट प्रसादी के रुप में किया जाता है। धार्मिक मान्यता अनुसार जब भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद जब पुन: अयोध्या लोटे तो उनके राजतिलक के बाद उनकी प्रजा ने उनके लिए 56 भोग बनाकर अपने राजा को खिलाया था। तबसे दीवाली के दुसरे दिन से भगवान को 56 लगाने की परम्परा चली आ रही है।
मंछापूर्ण बालाजी पर हुआ अन्नकुट –
अन्नकुट की श्रृंखला में मंछापूर्र्ण हनुमान मंदिर पर अन्नकुट प्रसादी का आयोजन किया गया। जिसमें मंछापूर्ण हनुमान को 56 भोग लगाकर उनके भक्तों को प्रसादी वितरित की गई। इस दौरान बालाजी का आकर्षक श्रृंगार भी किया गया। शाम को 7 बजे बालाजी महाराज की महाआरती के बाद प्रसादी का वितरण किया गया। इसी प्रकार स्टेशन चौराहा स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर पर भी रविवार को अन्नकुट प्रसादी का आयोजन किया गया। यहां भी शाम को बालाजी की महाआरती के बाद 56 भोग प्रसादी का भोग लगाकर अकेला हनुमान मंदिर प्रांगण में भक्तों के लिए भोजन प्रसादी का आयोजन बालाजी मित्र मंडल द्वारा किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में मित्र मंडल सदस्यों के साथ भक्तगण मौजुद रहे। इसी कड़ी में मंगलवार को भीमाखेड़ी स्थित बालाजी मंदिर पर अन्नकुट प्रसादी का आयोजन किया गया है। शाम को महाआरती के साथ बालाजी को 56 भोग लगाकर पुरे भीमाखेड़ी गांव के साथ जावरा के लोगों तथा अन्य बालाजी के भक्तों को प्रसादी ग्रहण की जाएगी।


