– 44 दिन की तपस्या में 36 दिन निराहार रहकर कर रहा कठिन तपस्या
– मध्यप्रदेश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी तपस्या जावरा में जारी
जावरा। प.पुु मुनिराज श्री चंद्रयशविजय जी म.सा. एवं प.पु. मुनिराज श्री जिनभद्र विजय जी म.सा. की पावनकारी निश्रा में क्रियोद्धार पुण्य भूमि जावरा में चल रहे आत्म शुद्धि चातुर्मास के अंतर्गत सिद्धि दायक सिद्धि तप की महान तपस्या चल रही है। मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार दादा गुरुदेव आचार्य श्री राजेन्द्रसूरिश्वर जी मसा की क्रियोद्धार भूमि जावरा पर चार्तुमास के दौरान 240 तपस्वी सिद्धीतप कर रहे हैं। जिसमें 8 साल की उम्र का सबसे छोटा तपस्वी मास्टर मितांश भी तपस्या कर रहा हैं।
शहर के 240 सिद्धितप तपस्वियों में नगर के 8 साल से 75 साल के तपस्वी तपस्या कर रहे है। सिद्धि तप 44 दिवसीय तप आराधना हैं। जिसमे तपस्वी 44 दिन में 36 दिवस निराहार रहता है जो केवल दिन में गरम पानी का उपयोग करता हैं। इस तपस्या में सबसे छोटे बाल तपस्वी 8 साल के मास्टर मितांश रितेश रांका है।इस बाल तपस्वी के संकल्प एवं आत्म बल को देख कर हर कोई अचंभित है। नगर में इस बाल तपस्वी की हर कोई अनुमोदना कर बहुमान कर रहा हैं। आज के इस युग मे जंहा बच्चों को फास्ट फूड चाहिए होटलों का चटपटा खाना चाहिए वंहा इस नन्हे बाल तपस्वी ने सिद्धितप की तपस्या करके जावरा नगर को, त्रिस्तुतिक श्रीसंघ जावरा को व रांका परिवार को गौरवान्वित कर दिया। धन्य है, जिनशासन, धन्य है तपस्वी, किंडर ग्रो स्कूल के कक्षा 3 के विद्यार्थी मितांश रांका हतनारा निवासी सुभाष रांका के पौत्र, रितेश रांका (सूरज इलेक्ट्रॉनिक्स )के पुत्र हैं। छोटे बाल तपस्वी की अनुमोदना में तपस्वी के माताजी श्रीमती पूर्वा रांका भी तपस्या कर रही हैं। 

