– उच्च शिक्षा मंत्रालय के आदेश को भी दरकिनार कर आयुक्त ने अब तक नहीं बनाया मॉडयूलर
– माडयूटर में इंट्री नहीं होने से अटका लिवइनकेशमेंट का करोड़ो रुपया
जावरा। मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के अधिनस्त अपना जीवन पर्यन्त काम कर सेवानिवृत होने वाले लगभग 500 से अधिक प्राध्यापक और सह प्राध्यापक बीते करीब डेढ़ साल से लीवइनकेशमेंट (अर्जित अवकाश नगदीकरण) के लाभ से वंचित हैं। जिससे अब प्राध्यापकों को नाराजगी बढ़ती जा रही हैं। उच्च शिक्षा सचिव मंत्रालय द्वारा प्राध्यापकों के अर्जित अवकाश बिलोके भुगतान के लिये आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग को एक मॉड्यूलर बनाने के आदेश दिये थे। लेकिन आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस दिशा में कोई काम नहीं किया गया हैं, जिसके चलते प्रदेश भर के सेवानिवृत प्राध्यापकों को उनके हक का पैसा नहीं मिल पाया हैं।
जावरा निवासी तथा शासकीय कन्या स्नातकोतर महाविद्यालय रतलाम से सहप्राध्यापक अर्थशास्त्र पद से सेवा निवृत हुए डॉ. मदनलाल गांगले ने बताया कि उच्च शिक्षा सचिव मंत्रालय द्वारा बिली के भुगतान के लिये आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग को एक मॉड्यूलर बनाने के आदेश दिये थे। लेकिन आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक कोई काम नहीं किया हैं इससे प्रदेश के पांच सौ प्रोफेसरों के अर्जित अवकाश की एन्ट्री माड्यूलर में नहीं हो पाने से अर्जित अवकाश नगदीकरण बिलों का करोडो रुपये का भुगतान अटका हुआ हैं। आयुक्त द्वारा जानबूझकर प्रकरण को लम्बा खींचकर भुगतान में देरी की जा रही है। कोई सुनने को तैयार नहीं है। डेढ़ साल पहले बिलों का भुगतान आसानी से होता था लेकिन अब नियम कानून आड़े आ रहा है।
सीएम हेल्पलाईन तक पहुंची शिकायत –
प्रदेश के समस्त सेवानिवृत प्राध्यापकों को उनके हक का पैसा दिलाने के लिए सेवानिवृत प्राध्यापक डॉ गांगले ने सीएम हेल्पलाईन के साथ ही अन्य माध्यमों से आयुक्त उच्च शिक्षा को अर्जित अवकाश नगदीकरण की शिकायत दर्ज की हैं, लेकिन फिर भी अब तक इस और काम नहीं हो पाया हैं, ऐसे में अब प्राध्यापक डॉ गांगले ने मामले में राज्यपाल से हस्तक्षेप करने का निवेदन किया हैं।
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