– जावरा-उज्जैन वर्तमान टू लेन को ही फोरलेन में कनवर्ट करने की उठ रही मांग
– कम लागत और कम समय में होगा फोरलेन का निर्माण
– जावरा उज्जैन तक टू लेन से लगे गांव व कस्बे होंगे खुशहाल, नहीं उजड़ेगा व्यापार
जावरा। सिहस्थ 2028 की तैयारियों में मध्यप्रदेश सरकार जुटी हैं। महाकाल की नगरी उज्जैन को देश के हर बड़े नगर से जोडऩे के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे से कनेक्टीविटी बनाने के लिए उज्जैन से जावरा तक ग्रीन फिल्ड एक्सेस कंट्रोल्ड वे (फोरलेन) प्रस्तावित किया। इसके लिए सरकार 5 हजार 17 करोड़ रुपए भी व्यय कर रही हैं, जबकि जावरा से उज्जैन तक वर्तमान में टू लेन बना हैं और इस पर अभी ट्रेफिक भी चालु हैं, टू लेन निर्माण के समय ही इसे भविष्य में फोरलेन बनाने की योजना के अनुसार ही तत्कालीन सरकार ने जमीन का अधिगृहण करते हुए संबंधित किसानों और भू स्वामियों को मुआवजा भी बांट दिया था। इतना ही नहीं इसी टू लेन पर स्थित भूतेड़ा पर दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस की कनेक्टिविटी दी गई हैं, इतना सब होने के बाद भी सरकार इस टू लेन सडक़ को फोरलेन में कनर्वट करने के बजाए 5 हजार करोड़ रुपए लगाकर नया फोरलेन क्यों बनाना चाह रही हैं .. ? यह सवाल सभी के मन में हैं, इसके पीछे भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाना या कमिशन खोरी … ? यह तो सरकार और उसके अधिकारी ही जाने।
कम लागत और कम समय में कनर्वट हो जाएगा टू लेन –
जावरा से उज्जैन तक घिनोदा बायपास से होकर बनाया गया टू लेन तकरीबन 90 से 95 किलोमीटर का हैं। इस टू लेन निर्माण के पूर्व ही सरकार ने भू अधिगृहण और मुआवजे की कार्रवाई भी पूर्ण हो गई। सरकार ने भू अधिगृहण भी इस सडक़ को फोरलेन में बदलने के लिए ही किया था। लेकिन अब इस सडक़ को छोडक़र सरकार नया ही सडक़ बनाने पर आमाद हैं। जबकि इस टू लेन को ही फोरलेन में कनर्वट करने में सरकार का व्यय भी बहुत कम होगा साथ ही कम समय में यह फोरलेन बनकर तैयार भी हो जाएगा। इस टू लेन को फोरलेन में कनर्वट करने के लिए सरकार को सिफ डीपीआर बनाना हैं और टेंडर कॉल करना हैं। इस सडक़ पर जो मोड़ हैं उन्है सीधा करना हैं और बसा बसाया फोरलेन बनकर तैयार हो जाएगा।
टू लेन से लगे गांव और कस्बे भी होंगे आबाद –
जावरा उज्जैन तक यह सडक़ पूरी बनी हैं, इस सडक़ पर भूतेड़ा, बड़ावदा, घिनोदा, नागदा, उन्हैल जैसे विकसित नगरो के साथ ही कई गांव भी जुड़े हैं, इस सडक़ के किनारे हजारों लोग अपना व्यापार कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं। ऐसे में यदि सरकार इस सडक़ को छोडक़र नया फोरलेन बनाती हैं तो इस टू लेन के किनारे आम जनता का जमा जमाया व्यापार चौपट हो जाएगा और यह टू लेन पुरी तरह से समाप्त हो जाएगा, बस केवल इस मार्ग पर जिन्है काम होगा, उन्ही लोगों की आवाजाही रहेगी। यदि सरकार 5 हजार करोड़ रुपए के नए फोरलेन को छोडक़र इस टू लेन को ही फोरलेन में कनर्वट कर दे तो जनता का करोड़ो रुपया भी बचेगा और इस टू लेन पर निवासरत लोगों का व्यापार व्यवसाय भी प्रभावित नहीं होगा। गांव और कस्बे हमेशा के लिए आबाद होंगे।
जन संघर्ष समिति के साथ कई लोगों की यही मांग –
सरकार द्वारा प्रस्तावित नवीन एक्सेस वे के विरोध में लगातार तीन माह तक धरना प्रदर्शन करने वाली जन संघर्ष समिति ने भी नए फोरलेन के बजाय वर्तमान टू लेन को ही फोरलेन में कनर्वट करने की मांग रखी थी। वहीं कांग्रेस नेता अरविंद हाड़ा ने बताया कि नया रोड़ बनता हैं तो यह टू लेन पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। कई विकसित नगर व कस्बे विरान हो जाएंगे। सरकार 5 हजार करोड़ रुपए खर्च कर नया फोरलेन बनाना चाहती हैं, जो कि सरासर जनता के पैसों का दुरुपयोग हैं। व्यापारी संतोष राठौर और मुकेश राठौर ने बताया कि सरकार पूर्व में टू लेन निर्माण के दौरान फोरलेन के अनुसार जमीन का अधिगृहण कर चुकी हैं, मुआवजा भी दे चुकी हैं तो अब नया फोरलेन क्यों बनाया जा रहा हैं, सरकार इसी टू लेन को फोरलेन में कनर्वट कर दे तो जनता का पैसा और सरकार का समय दोनो बचेंगे और इस सडक़ का काम भी जल्द पुरा होगा। सरकार उज्जैन से बडऩगर से बदनावर की तरह ही इसी टू लेन को फोरलेन में कनर्वट करें तो आम जनता को राहत मिलेगी।





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