– अभी नहीं जागी जनता तो भविष्य में हादसों के लिए रहे तैयार
– अप्रेल में पुरा होने वाला अण्डर ब्रिज जून में भी अधुरा
जावरा। शहर को जनप्रतिनिधियों ने ओव्हरब्रिज के साथ अण्डरब्रिज की सौगात दी, ओव्हरब्रिज तो बनकर तैयार हो गया, इस पर ट्रेफिक भी चालु हो गया। इधर अण्डरब्रिज बनने से पहले ही रेलवे दोहरीकरण के चलते रहवासियों और व्यापारियों के विरोध के बाद भी रेलवे फाटक क्रमांक 177 को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। फाटक बंद करने के साथ ही डीआरएम और अन्य अधिकारियों ने अप्रेल माह तक अण्डरब्रिज चालु करने का आश्वासन दिया, लेकिन जून माह तक भी यह अण्डरब्रिज अधुरा ही पड़ा हैं। चौपाटी क्षैत्र में ब्रिज लिए के खुदाई शुरु हो गई हैं। वहीं रेलवे टे्रक के नीचे बाक्स रख दिए गए हैं। लेकिन पुलिस थाना रोड़ की और अब तक ब्रिज की निकासी के लिए खुदाई का काम शुरु नहीं हो सका हैं।
भोपाल की तरह समकोण बन रहा ब्रिज –
अण्डरब्रिज निर्माण के दौरान चौपाटी से आंटिया चौराहे से अण्डरब्रिज में प्रवेश के लिए रेलवे फाटक के समीप से ठेकेदार ने खुदाई प्रारंभ कर दी हैं। लेकिन वर्तमान में खुदाई के बाद जो स्थिति बनी हैं, वह ठीक भोपाल में बने ऐशबाग रेलवे ओव्हरब्रिज की तरह दिखाई दे रहा हैं। इसमें भी ढलान से नीचे उतरते ही सीधे ब्रिज की दीवार आ रही हैं, उसके बाद बाक्स में होकर दुसरी और निकलना पड़ेगा। ऐसे में ढलान के चलते कई हादसे होने की पूरी संभावना हैं, ढलान से उतरते ही सिधी दीवार से कई वाहनों के टकराने की संभावना हैं, वहीं सामने की और से आने वाले वाहनों को भी परेशानी होगी।
अण्डर ब्रिज की ऊचाई काफी कम –
अण्डरब्रिज निमार्ण शुरु होने से लेकर अब तक सेतु विकास निगम इस अण्डरब्रिज की ड्राईंग डिजाईन उपलब्ध नहीं करवा पाया हैं। ऐसे में यह ब्रिज किस प्रकार बनेगा, इसकी अंदाजा किसी को भी नहीं हैं, लेकिन जो स्ट्रक्चर अभी दिखाई दे रहा हैंं, उसके मान से तो जो भी बनेगा, वह अपने आप में एक अजुबा ही बनेगा। समकोण आकृति के ठीक बाद ब्रिज अण्डरपास के बाक्स लगे हैं, जिनकी ऊंचाई काफी कम हैं। जिससे बड़ी कार या बड़े लोडिंग वाहन भी निकलना संभव नहीं हैं। इस अण्डरपास की ऊंचाई को देखकर ऐसा लगता हैं यह केवल दुपहिया और छोटे चार पहिया व तीन पहिया वाहनों के निकलने के लिए ही बनाया गया हैं।
अभी नहीं जागे तो आगे होगी परेशानी –
नवाब की नगरी के नाम से विख्यात जावरा शहर वैसे तो काफी शांत हैं, यहां की आम जनता शांतिप्रिय हैं, जिसके चलते कई बड़े प्रोजेक्ट गलत बन चुके हैं। पहले चौपाटी चौराहे पर ओव्हरब्रिज नहीं सका, फिर सर्कल की मांग पूरी नहीं हो सकी, ओव्हरब्रिज निर्माण के दौरान चौड़ाई का जनता ने विरोध किया तो ब्रिज की चौडाई कम करना पड़ी। अब अण्डरब्रिज बन रहा हैं, तो इसकी ऊंचाई और चौड़ाई इतनी कम हैं कि एक साथ दो चार पहिया वाहन तक निकलना मुश्किल हैं। ऊपर से बाक्स के समीप ही समकोण आकृति बन रही हैं। ऐसे में यदि अभी जावरा की जनता नहंी जागी और इस समकोण आकृति वाले अण्डर ब्रिज का विरोध नहीं किया तो आगे कई परेशानी होगी। जिसका खामीयाजा भी आम जनता को ही उठाना पड़ेगा।





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