– 10 हजार से अधिक नए किसानों को मिलेगा खेती का मौका, सीपीएस किसानों और पुराने लाइसेंसधारियों को भी राहत
– सांसद सुधीर गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री का जताया आभार
जावरा/मंदसौर। अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए नई नीति ने कहीं खेती का रास्ता खोला है, तो कहीं पात्रता के मानकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2026-27 की अफीम लाइसेंसिंग नीति शनिवार को घोषित कर दी है। एक ओर 10 हजार से अधिक नए किसानों को खेती से जोडऩे, सीपीएस पद्धति के किसानों को राहत देने और पुराने लाइसेंस संबंधी मामलों में अवसर देने के प्रावधान किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर मॉर्फिन औसत के निर्धारित मानकों को पूरा करना किसानों के लिए अहम बना हुआ है।
जावरा-मंदसौर-नीमच क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता ने नई नीति का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नई नीति में अफीम उत्पादक किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अब क्षेत्र के किसानों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई नीति के तहत उनका लाइसेंस किस श्रेणी में बनेगा और उन्हें चीरा पद्धति में खेती का अवसर मिलेगा या सीपीएस पद्धति अपनानी पड़ेगी।
चीरा पद्धति के लिए 4.4 किलो मॉर्फिन का मानक –
नई नीति के उपलब्ध विवरण के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में प्रति हेक्टेयर 4.4 किलोग्राम से अधिक मॉर्फिन औसत प्राप्त करने वाले पात्र किसान निर्धारित शर्तों के अधीन चीरा पद्धति में 10 आरी तक का लाइसेंस प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं। सांसद सुधीर गुप्ता के अनुसार, चीरा पद्धति के अंतर्गत पिछले वर्ष निर्धारित मॉर्फिन औसत पूरा करने वाले पात्र किसानों को 10 आरी का लाइसेंस देने का प्रावधान किया गया है। इससे पारंपरिक चीरा पद्धति से अफीम की खेती करने वाले किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
कम मॉर्फिन औसत वाले किसानों के सामने क्या विकल्प ? –
सीपीएस यानी बिना चीरा लगाए पोस्त भूसा उत्पादन की पद्धति के अंतर्गत भी किसानों के लिए अलग पात्रता प्रावधान किए गए हैं। उपलब्ध नीति विवरण के अनुसार, पिछले फसल वर्ष में 3.0 से अधिक लेकिन 4.4 किलोग्राम से कम मॉर्फिन औसत वाले कुछ पात्र किसानों को निर्धारित शर्तों के अधीन 5 आरी का सीपीएस लाइसेंस प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, कम मॉर्फिन औसत होने का अर्थ हर स्थिति में स्वत: लाइसेंस निरस्त होना नहीं है। पात्रता किसान की श्रेणी, पिछले फसल वर्ष के रिकॉर्ड और नीति में दी गई शर्तों पर निर्भर करेगी।
10 हजार से अधिक नए किसान अफीम खेती से जुड़ेंगे –
नई नीति का एक प्रमुख पहलू 10 हजार से अधिक नए किसानों को अफीम की खेती से जोडऩे का प्रावधान है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 1998-99 से 2002-03 तक के संबंधित किसानों के लिए मॉर्फिन औसत के निर्धारित मानक में 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की कमी करते हुए पात्रता का प्रावधान किया गया है। सांसद सुधीर गुप्ता ने भी नए किसानों को खेती से जोडऩे के इस प्रावधान को महत्वपूर्ण बताया है। इसके तहत पात्र किसानों को सीपीएस पद्धति में 5 आरी का लाइसेंस प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
होल्ड लाइसेंस वाले किसानों को भी राहत –
पिछले वर्ष सीपीएस पद्धति के अंतर्गत जिन किसानों के लाइसेंस होल्ड किए गए थे, उन्हें भी निर्धारित पात्रता एवं शर्तों के अधीन इस वर्ष 5 आरी का लाइसेंस देने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा, ऐसे किसान जो पिछले वर्ष लाइसेंस प्राप्त करने के पात्र थे, लेकिन किसी कारणवश लाइसेंस नहीं ले सके, उन्हें भी नियमों के अनुसार अवसर मिल सकता है। एनडीपीएस मामलों में दोषमुक्त हो चुके किसानों को भी निर्धारित पात्रता शर्तों के अधीन लाइसेंस प्रक्रिया में शामिल होने का प्रावधान बताया गया है।
800 किलो पोस्त भूसा जमा कराने वाले किसानों को अवसर –
सीपीएस पद्धति के अंतर्गत पिछले फसल वर्ष में प्रति हेक्टेयर 800 किलोग्राम से अधिक पोस्त भूसा विभाग में जमा कराने वाले पात्र किसानों के लिए भी 5 आरी का लाइसेंस प्राप्त करने का प्रावधान बताया गया है। इससे संबंधित किसानों को निर्धारित शर्तों के अधीन खेती का अवसर मिल सकता है।
मिलावट और नियमों के उल्लंघन पर भी नजर –
अफीम लाइसेंसिंग व्यवस्था में केवल मॉर्फिन औसत ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और निर्धारित शर्तों का पालन भी महत्वपूर्ण है। अफीम में पानी या अन्य पदार्थों की मिलावट, गुणवत्ता संबंधी अनियमितता और विभागीय निर्देशों के उल्लंघन से लाइसेंस पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसी प्रकार, फसल को पूरी तरह जोतने यानी प्लाउ-बैक से संबंधित मामलों में भी नीति के विशेष प्रावधान लागू होते हैं। इसलिए किसानों के लिए अपनी फसल, तौल और विभागीय रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी का सही होना जरूरी है।
वास्तविक खेती के क्षेत्रफल में 5 प्रतिशत तक की छूट –
नई नीति में वास्तविक खेती का क्षेत्र लाइसेंस में दर्ज क्षेत्रफल से 5 प्रतिशत तक अधिक पाए जाने पर निर्धारित नियमों के अनुसार छूट देने का प्रावधान किया गया है। इससे निर्धारित सीमा के भीतर क्षेत्रफल में अंतर वाले मामलों में पात्र किसानों को राहत मिल सकती है।
पांच फसल वर्षों के लिए सीपीएस लाइसेंस का प्रावधान –
सीपीएस पद्धति के अंतर्गत पांच फसल वर्षों के लिए एकमुश्त लाइसेंस देने का प्रावधान भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सांसद सुधीर गुप्ता ने इसे किसानों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे पात्र किसानों को आगामी वर्षों में लाइसेंस व्यवस्था में निरंतरता मिलेगी और बार-बार लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम होगी।
ऑनलाइन पोर्टल पर जारी होगी पात्र किसानों की सूची –
पात्र किसानों की सूची केंद्रीय स्वापक ब्यूरो (सीबीएन) की आधिकारिक वेबसाइट एवं ऑनलाइन पोर्टल पर जारी की जाएगी। किसानों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिन मौजूदा लाइसेंसधारियों के दस्तावेज विभाग के पास पहले से उपलब्ध हैं और जिनकी जानकारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, उन्हें वही दस्तावेज दोबारा जमा करने से राहत देने का प्रावधान भी बताया गया है। इससे लाइसेंस प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।
किसानों के हितों को लेकर केंद्र सरकार प्रतिबद्ध : सांसद सुधीर गुप्ता –
सांसद सुधीर गुप्ता ने सभी अफीम उत्पादक किसान भाइयों को नई नीति की बधाई देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा, उनके कल्याण और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पुन: आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि नई नीति के विभिन्न प्रावधानों से बड़ी संख्या में पात्र किसानों को लाभ मिलेगा।
अब आधिकारिक पात्रता सूची पर किसानों की नजर –
नई अफीम नीति में एक ओर नए किसानों को अवसर देने और मौजूदा किसानों को राहत देने के प्रावधान हैं, तो दूसरी ओर मॉर्फिन औसत और लाइसेंस पात्रता को लेकर किसानों की जिज्ञासाएं भी बनी हुई हैं। अब किसानों को आधिकारिक पात्रता सूची और विभागीय दिशा-निर्देशों का इंतजार है, जिनसे आगामी फसल के लिए उनकी स्थिति स्पष्ट होगी।
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