– कलेक्टर ने खाली भवनों में आंगनवाडिय़ां शिफ्ट करने के आदेश दिए, लेकिन पुराने स्कूलों का रिकॉर्ड, फर्नीचर और सरकारी सामग्री अब तक वहीं!
– भवन हैंडओवर होने से पहले जवाबदेही तय होगी या फिर विभाग एक-दूसरे का मुंह ताकते रहेंगे ?
जावरा। शहर के कई सरकारी स्कूल मर्ज हो गए, बच्चे और स्टाफ सांदीपनि स्कूल पहुंच गए, लेकिन विद्यार्थियों का रिकॉर्ड, फर्नीचर और अन्य सरकारी सामग्री पुराने स्कूलों के बंद भवनों में ही पड़ी है। अब जिला कलेक्टर अजय कटेसरिया ने इन्हीं खाली भवनों में किराए पर चल रही आंगनवाडिय़ों को स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में सवाल सीधा है—जब स्कूलों का संचालन मर्ज हो चुका है, तो बच्चों के भविष्य से जुड़े दस्तावेज अब तक पुराने भवनों में क्यों कैद हैं ? भवन आंगनवाडिय़ों को सौंपने से पहले रिकॉर्ड और सरकारी सामान का हिसाब कौन देगा ? अगर कल कोई दस्तावेज गायब हुआ या सामान चोरी हो गया, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी—पुराने स्कूल प्रभारियों की, सांदीपनि स्कूल प्रशासन की या शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ?
रतलाम कलेक्टर के 16 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार जावरा शहर के छह आंगनवाड़ी केंद्रों को निर्धारित शासकीय स्कूल भवनों में स्थानांतरित करने की स्वीकृति दी गई है। आदेश का उद्देश्य रिक्त शासकीय भवनों का उपयोग कर किराए के भवनों में संचालित आंगनवाडिय़ों को सुविधा उपलब्ध कराना है। हालांकि, भवनों को नए उपयोग के लिए सौंपने से पहले उनमें रखी पुरानी शैक्षणिक सामग्री और रिकॉर्ड के सुरक्षित हस्तांतरण का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।
बंद स्कूलों में अब भी कैद है बच्चों का भविष्य से जुड़ा रिकॉर्ड –
स्कूलों के मर्ज होने के बाद विद्यार्थी और स्टाफ सांदीपनि स्कूल में स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन पुराने स्कूल भवनों में विद्यार्थियों के रिकॉर्ड, फर्नीचर और अन्य सामग्री रखी होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल इन भवनों पर ताले लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित स्कूलों का रिकॉर्ड अब तक सांदीपनि स्कूल में व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया ? बताया जा रहा है कि मर्ज हुए स्कूलों के प्रभारियों द्वारा रिकॉर्ड सांदीपनि स्कूल में जमा कराने के लिए कई बार कहा गया है। इसके बावजूद रिकॉर्ड और अन्य सामग्री के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस मामले में सांदीपनि स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
विद्यार्थी को अंकसूची या टीसी चाहिए तो पुराने स्कूल जाना पड़ता है –
इस व्यवस्था का सीधा असर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर भी पड़ सकता है। यदि किसी पूर्व विद्यार्थी को अंकसूची, स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी), स्कॉलरशिप से संबंधित दस्तावेज या अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है, तो संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य/प्रभारी को पुराने भवन में जाकर ताला खोलना और रिकॉर्ड निकालना पड़ता हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित शिक्षक या प्रधानाचार्य को अध्यापन कार्य के साथ पुराने रिकॉर्ड की व्यवस्था भी संभालनी पड़ती है। इससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है। विद्यार्थियों को समय पर दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए रिकॉर्ड का एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान पर उपलब्ध होना जरूरी है।
आंगनवाड़ी को भवन सौंपने से पहले रिकॉर्ड और सामग्री का क्या होगा ? –
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला कलेक्टर के आदेश के बाद जब खाली स्कूल भवनों को आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा जाएगा, तब वहां मौजूद रिकॉर्ड, फर्नीचर और अन्य सामग्री का क्या होगा ? क्या भवनों को सामान सहित हैंडओवर किया जाएगा या पहले सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड और उपयोगी सामग्री को सांदीपनि स्कूल में जमा कराया जाएगा ? यदि भवन हस्तांतरित होने के बाद कोई रिकॉर्ड गुम होता है या सामान चोरी हो जाता है, तो इसकी जवाबदेही किस अधिकारी या विभाग की होगी ? इन सवालों का स्पष्ट जवाब जरूरी है, ताकि भवनों का उपयोग शुरू होने के बाद किसी प्रकार का विवाद या अव्यवस्था न हो।
भवनों की चाबी किसके पास और जिम्मेदारी किसकी ? –
जब पुराने स्कूल भवन बंद हैं, तो उनकी चाबियां किसके पास हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की है ? क्या संबंधित स्कूल के प्रभारी रिकॉर्ड और सामग्री की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं या मर्ज होने के बाद इसकी जिम्मेदारी सांदीपनि स्कूल प्रशासन को संभालनी चाहिए ? शिक्षा विभाग को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए रिकॉर्ड, फर्नीचर और अन्य सामग्री की सूची तैयार कर सुरक्षित हस्तांतरण सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही भवनों को महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने से पहले हैंडओवर की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए।
प्रशासन को तय करनी होगी जवाबदेही –
कलेक्टर के आदेश से किराए के भवनों में संचालित आंगनवाडिय़ों को शासकीय भवन उपलब्ध होने का रास्ता खुला है, लेकिन इसके साथ पुराने स्कूलों की संपत्ति और विद्यार्थियों के रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि भवनों का हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत होगा, रिकॉर्ड कहां सुरक्षित रखा जाएगा और संबंधित सामग्री की जिम्मेदारी किसकी रहेगी। अब बड़ा सवाल यही है कि जब स्कूल मर्ज हो चुके हैं और विद्यार्थी व स्टाफ सांदीपनि स्कूल में शिफ्ट हो गए हैं, तो पुराने स्कूलों का रिकॉर्ड, फर्नीचर और अन्य शासकीय सामग्री अब तक वहां क्यों पड़ी है ? आंगनवाडय़िों को भवन सौंपने से पहले इस सवाल का जवाब और रिकॉर्ड के सुरक्षित हस्तांतरण की व्यवस्था जरूरी है।
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