– फरियादी ने लगाया गंभीर आरोप—आरोपियों पर कार्रवाई के नाम पर मांगे 15 हजार
– राशि देने के बाद भी कार्रवाई नहीं; उल्टा माता-पिता पर FIR दर्ज करने का दावा,
– SP ने दिए 3 दिन में जांच रिपोर्ट के निर्देश
जावरा/कालूखेड़ा। कालूखेड़ा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक के खिलाफ गंभीर शिकायत सामने आने के बाद रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक 779 महेंद्र फतरोड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रधान आरक्षक पर फरियादी से कथित रूप से 15 हजार रुपए मांगने और राशि लेने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं।
फरियादी ने एसपी को दी शिकायत, लगाए गंभीर आरोप –
पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायत आवेदन में ग्राम चिकलाना निवासी संजय पिता देवीालाल धाकड़ ने बताया कि उसकी पत्नी का उसकी बुआ एवं मम्मी के साथ विवाद हुआ था। इसी विवाद के चलते 19 जुलाई 2026 की रात करीब 9 बजे घनश्याम एवं अरुण पिता जगदीश धाकड़, निवासी ग्राम नीमन, उसके घर में जबरन आए और कथित रूप से मारपीट, गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद संजय द्वारा कालूखेड़ा थाने पहुंचकर शिकायत की गई।
आरोपियों को जेल भेजने की बात कहकर मांगे 15 हजार ! –
शिकायत के अनुसार, थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक महेंद्र फतरोड़ ने फरियादी से कथित रूप से कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रकरण बनाकर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इसके लिए 15 हजार रुपए की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है। फरियादी का दावा है कि उसने मांगी गई 15 हजार रुपए की राशि दे दी, लेकिन इसके बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कार्रवाई के बजाय माता-पिता पर FIR का आरोप –
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय उसकी माता एवं पिता के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। इसके बाद संजय ने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की।
एसपी ने माना आरोप गंभीर, प्रधान आरक्षक निलंबित –
शिकायत पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के समक्ष पहुंचने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। आदेश में प्रधान आरक्षक महेंद्र फतरोड़ के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को गंभीर माना गया है। इसके बाद प्रधान आरक्षक 779 महेंद्र फतरोड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र रतलाम से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
तीन दिन में प्राथमिक जांच रिपोर्ट के निर्देश –
पुलिस अधीक्षक ने मामले की प्राथमिक जांच के लिए सीएसपी जावरा को निर्देशित किया है। आदेश के अनुसार प्रधान आरक्षक महेंद्र फतरोड़ एवं अन्य दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध प्राथमिक जांच कर तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा।
जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई –
फिलहाल पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए 15 हजार रुपए मांगने, राशि लेने और आरोपियों पर कार्रवाई नहीं करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

