– गीता भवन में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भावपूर्ण समापन
– ट्रस्टियों ने शॉल श्रीफल से किया शास्त्रीजी का सम्मान
जावरा। भागवत कथा मनुष्य को असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरता की ओर ले जाने का दिव्य मार्ग है। यही भागवत की वास्तविक सत्यता है।
यह बात गीता भवन पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथा प्रवक्ता भीमा शंकर शास्त्री ने भावविभोर करते हुए कही। शास्त्रीजी ने कहा कि जब धर्म का विस्तार होता है तो समाज और जीवन दोनों समृद्ध होते हैं, लेकिन जब धर्म घटता है तो सब कुछ ढहने लगता है। जो व्यक्ति धन से गरीब है, वह वास्तव में दरिद्र नहीं होता, लेकिन जिसके पास प्रभु भक्ति नहीं है, वही सच्चा दरिद्र है।
मुस्कान संक्रामक, इसे बांटते रहना चाहिए –
कथा प्रवक्ता ने मुस्कान और सकारात्मकता का संदेश देते हुए कहा कि जो व्यक्ति संतुलित और शांत रहता है, वही सदा मुस्कराता है। मुस्कान संक्रामक होती है, इसे बांटते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेदों का अध्ययन आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है जीवन में धर्म, सेवा और सहयोग को उतारना। केवल पढऩा नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में लाना ही सच्ची साधना है। पौथी पूजन और आरती का लाभ सेंट्रल बैंक मेनेजर विकास मीणा, बलवंतसिंह राठौर, अनिल धारीवाल, अशोक जैन आंटिया, रजत सोनी, हिरालाल मेहता, महेश सोनी, बाबूलाल निंबे आदि ने लिया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति, भक्ति और भावनाओं से पूरा गीता भवन परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
शाल श्रीफल से किया शास्त्रीजी का सम्मान –
कथा समापन के अवसर पर गीता भवन ट्रस्ट अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय के साथ ट्रस्ट सचिव अशोक सेठिया, राजेन्द्र गर्ग, राजेन्द्र श्रोत्रिय, मोहन पटेल, गायत्री प्रसाद मंडलोई, प्रदीपसिंह सोलंकी, आनंद गर्ग के साथ संत सेवा समिति के राजेश शर्मा, दशरथ कसानिया, मनोहर पांचाल, आनंद पांचाल, दिलीप हेमावत, कृष्णकांत मोईनीवार, मनोहरसिंह चौहान सहित ट्रस्ट सदस्यों ने भीमा शंकर शास्त्री का शॉल श्रीफल से सम्मान किया गया। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रृद्धालु उपस्थित रहे।
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