– ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई : पंचायत रिकॉर्ड से खेल, शासकीय भूमि हड़पी
– तत्कालीन सरपंच व दो सचिवों सहित सात लोगों पर गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ प्रकरण
जावरा। ग्राम रियावन में करोड़ों की शासकीय जमीन घोटाले का पर्दाफाश
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू)भोपाल ने रतलाम जिले की ग्राम पंचायत रियावन में हुए गंभीर भूमि घोटाले का खुलासा करते हुए पूर्व सरपंच, दो पूर्व सचिवों और उनके परिजनों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया है। पंचायत रिकॉर्ड में हेरफेर कर ग्राम आबादी की बेशकीमती शासकीय भूमि हड़पने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।
पंचायत रिकॉर्ड गायब कर रची गई साजिश –
ईओडब्ल्यू मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध शिकायत क्रमांक 164/25 के सत्यापन में सामने आया कि तत्कालीन सरपंच सूरजबाई धाकड ने तत्कालीन सचिव घनश्याम सूर्यवंशी एवं अशोक सेन के साथ मिलकर ग्राम पंचायत रियावन के शासकीय अभिलेख (संपत्ति कर पंजी 2011-12) को गायब/नष्ट कर दिया। इसके स्थान पर कूटरचित रिकॉर्ड तैयार कर फर्जी प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
फर्जी प्रमाण पत्रों से रिश्तेदारों के नाम कराई जमीन –
घोटाले के तहत सर्वे क्रमांक 1411 स्थित लगभग 3000 वर्गफीट शासकीय खुली भूमि को तीन हिस्सों में बांटकर 900-900 वर्गफीट के तीन फर्जी भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र जारी किए गए।
चमनलाल धाकड (दामाद) – 29.10.2019
राजेश धाकड (पुत्र के साले) – 29.10.2019
टीना धाकड (साले की पत्नी) – 18.12.2019
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का आपसी क्रय-विक्रय कर ई-रजिस्ट्री कराई गई और बाद में राजस्व रिकॉर्ड में भूखण्ड क्रमांक 752, 753, 754 के रूप में दर्ज कराकर शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया गया।
कौन-कौन हैं आरोपी –
सूरजबाई धाकड – तत्कालीन सरपंच, ग्राम रियावन
घनश्याम सूर्यवंशी – तत्कालीन सचिव, रानीगांव
अशोक सेन (परमार) – तत्कालीन सचिव
चमनलाल धाकड
राजेश धाकड
टीना धाकड
उमा धाकड
गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज, त्वरित कार्रवाई के निर्देश –
ईओडब्ल्यू उज्जैन इकाई द्वारा सत्यापन में आरोप सही पाए जाने पर सभी आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, कूटरचना, पद के दुरुपयोग और दुष्प्रेरण के तहत मामला दर्ज किया गया है। ईओडब्ल्यू ने भादवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(ग) एवं 12। ईओडब्ल्यू ने प्रकरण को विवेचना में लेते हुए त्वरित एवं कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पंचायत में बैठे जिम्मेदारों द्वारा शासकीय जमीन की लूट का यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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